Rolls-Royce भारत में अपने ऑपरेशंस को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहा है। कंपनी यूके, यूएस और जर्मनी के बाद भारत को अपना तीसरा 'होम मार्केट' बनाने की तैयारी में है। इस स्ट्रैटेजी के तहत, कंपनी ने भारत में £30 मिलियन का भारी निवेश किया है।
भारत बनेगा तीसरा 'होम मार्केट'
यह निवेश दो मुख्य जगहों पर हो रहा है। पहला, तमिलनाडु के होसुर में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई जा रही है। यह Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के साथ IAMPL (International Aerospace Manufacturing Private Limited) नामक जॉइंट वेंचर का हिस्सा है। इस नई यूनिट से सिविल और मिलिट्री इस्तेमाल के लिए हाई-प्रिसिजन एयरो-इंजन कंपोनेंट्स की सोर्सिंग बढ़ेगी। दूसरा, बेंगलुरु में कंपनी के ग्लोबल कैपेबिलिटी एंड इनोवेशन सेंटर का विस्तार किया जा रहा है, जो अब कंपनी का सबसे बड़ा ग्लोबल हब बन गया है। यहां डिजिटल, एंटरप्राइज सर्विसेज और इंजीनियरिंग टीम्स को कंसॉलिडेट किया जाएगा। Rolls-Royce की योजना अगले 5 सालों में भारत से अपनी सोर्सिंग को दोगुना करने की है।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस और मार्केट पोजीशन
Rolls-Royce ने 2025 के फाइनेंशियल ईयर में शानदार रिकवरी दिखाई है। कंपनी ने £3.5 बिलियन का अंडरलाइंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया है, जिसमें 17.3% का मार्जिन शामिल है। यह फाइनेंशियल मजबूती भारत जैसे स्ट्रैटेजिक निवेशों को सहारा दे रही है। फिलहाल, कंपनी का स्टॉक 17-18 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जो एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में एक मॉडरेट वैल्यूएशन माना जाता है। कंपनी की मार्केट कैप लगभग £105-138 बिलियन के बीच है।
भारत का बढ़ता एयरोस्पेस मार्केट
भारत का एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि सरकारी खर्च और 'मेक इन इंडिया' पहल के बूते यह सेक्टर 2030 तक $70 बिलियन तक पहुंच जाएगा। यह माहौल Rolls-Royce की महत्वाकांक्षाओं के लिए काफी अनुकूल है, जिसमें भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के लिए इंजन सह-विकसित करना और इलेक्ट्रिक वॉरशिप प्रोजेक्ट्स पर सहयोग करना शामिल है।
मुकाबला और जोखिम
Rolls-Royce को GE Aerospace और Safran जैसी बड़ी कंपनियों से मुकाबला करना पड़ेगा, जिनकी भारत में भी अच्छी-खासी मौजूदगी है। इसके अलावा, HAL जैसी स्थानीय कंपनियों के साथ कोलेबोरेशन भी कंपनी की रणनीति का अहम हिस्सा है।
हालांकि, भारत में विस्तार के अपने जोखिम भी हैं। एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को सफलतापूर्वक लागू करना, लोकल पार्टनर्स के साथ आरएंडडी (R&D) कोलेबोरेशन को बढ़ावा देना, और सरकारी पहलों पर निर्भरता जैसे मुद्दे कंपनी के लिए चुनौती बन सकते हैं। एनालिस्ट्स का नज़रिया आम तौर पर पॉजिटिव है, और स्टॉक के लिए 1400 GBP के आसपास टारगेट प्राइस बने हुए हैं। फिर भी, कुछ वैल्यूएशन मॉडल बताते हैं कि शेयर अपनी भविष्य की कमाई के मुकाबले थोड़ा महंगा हो सकता है।
भविष्य की राह
Rolls-Royce ने अपने मिड-टर्म गाइडेंस को भी बढ़ाया है। कंपनी 2028 तक £4.9 बिलियन से £5.2 बिलियन के बीच ऑपरेटिंग प्रॉफिट का लक्ष्य लेकर चल रही है। भारत में किए गए ये निवेश इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे, जिससे कंपनी की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी।
