डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने नई 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' का अनावरण किया है। भारतीय सेना अब AI, ऑटोनॉमस सिस्टम और साइबर कैपेबिलिटी से लैस होगी। फाइनेंशियल ईयर **2026** में देश का डिफेंस प्रोडक्शन **₹1.78 लाख करोड़** के पार पहुंच चुका है, जो घरेलू डिफेंस कंपनियों के लिए लंबी अवधि के बड़े मौके खोल रहा है।
भारत सरकार ने अपनी नई 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' (Land Warfare Doctrine) को लॉन्च कर दिया है, जो भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। नई दिल्ली में आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने साफ किया कि अब भारतीय सेना का जोर पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन सिस्टम और साइबर सुरक्षा पर होगा।
डिफेंस सेक्टर में तेजी के संकेत
आधुनिकीकरण का यह दौर ऐसे समय में आया है जब भारत का डिफेंस प्रोडक्शन नई ऊंचाई पर है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ रहा, जबकि एक्सपोर्ट का आंकड़ा ₹38,000 करोड़ के स्तर को छू गया। 'आत्मनिर्भरता' अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि मिलिट्री प्रोक्योरमेंट की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
निवेशकों के लिए क्या है मौका?
यह डॉक्ट्रिन उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है जो डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड सिस्टम्स में काम कर रही हैं। Bharat Electronics, Hindustan Aeronautics, Zen Technologies और Astra Microwave Products जैसी कंपनियों के पास आने वाले समय में नए टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट्स का पाइपलाइन मजबूत रह सकता है।
हालांकि, निवेश के लिहाज से एक बात ध्यान रखने वाली है—इम्पोर्टेड हार्डवेयर से इंडीजीनस (स्वदेशी) हाई-टेक सिस्टम पर शिफ्ट होना चुनौतीपूर्ण है। कंपनियों को मिलिट्री के कठिन मानकों (Military Specifications) पर खरा उतरना होगा। बाजार की नजर अब इस पर रहेगी कि सरकार इन नई तकनीकी पहलों के लिए बजट में किस तरह का एलोकेशन करती है। आने वाले समय में जो कंपनियां केवल हार्डवेयर ही नहीं, बल्कि 'इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस' दे पाएंगी, उन पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।
