रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने 'Aatmanirbharta 2.0' लॉन्च कर दिया है, जो हाई-टेक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित है। सरकार ने नेवी के लिए **₹1,900 करोड़** के कॉन्ट्रैक्ट्स फाइनल कर लिए हैं, जबकि **₹3,500 करोड़** के प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने भारत की आत्मनिर्भरता पहल का दूसरा चरण यानी 'Aatmanirbharta 2.0' पेश किया है। इसका उद्देश्य केवल आयात को कम करना नहीं, बल्कि ग्लोबल लेवल की टेक्नोलॉजिकल क्षमता हासिल करना है। सरकार अब 'Dual Technology Roadmap' पर काम कर रही है, ताकि सिविल और मिलिट्री जरूरतों को एक साथ पूरा किया जा सके। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम सेंसिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।\n\n### नेवल मॉडर्नाइजेशन और ऑर्डर्स\n\nभारतीय नौसेना इस बदलाव की मुख्य धुरी बनी हुई है। पांचवें 'Swavlamban' सेमिनार में जानकारी दी गई कि iDEX (Innovations for Defence Excellence) के तहत नेवी से जुड़े चैलेंज 2022 में 20 थे, जो अब बढ़कर 229 हो गए हैं। इससे स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों को डिफेंस सप्लाई चेन में बड़ा मौका मिल रहा है। नेवी ने अब तक ₹1,900 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स फाइनल कर दिए हैं और ₹3,500 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।\n\n### डिफेंस इकोसिस्टम पर असर\n\nनिवेशकों के लिए यह एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव का संकेत है। अब तक डिफेंस का फायदा मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों (DPSUs) को मिल रहा था, लेकिन अब फोकस हाई-टेक और स्पेशलाइज्ड कंपोनेंट्स पर है। इससे उन प्राइवेट कंपनियों को सीधा लाभ होगा जो सेंसर, कम्युनिकेशन सिस्टम और सॉफ्टवेयर में माहिर हैं।\n\n### चुनौतियां और रिस्क\n\nनिवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी में R&D का खर्च ज्यादा होता है और लंबा समय लगता है। स्टार्टअप्स और MSMEs को प्रोजेक्ट्स में देरी और बजट ओवररन (Cost Overruns) जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि कितनी जल्दी ₹3,500 करोड़ की पाइपलाइन असल ऑर्डर्स में बदलती है।
