रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्राइवेट सेक्टर से R&D में निवेश बढ़ाने की अपील की है। भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट वित्त वर्ष **2026** में **₹38,424 करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, और सरकार अब घरेलू प्रोडक्शन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को **50%** तक ले जाने का लक्ष्य बना रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स' के 8वें सालाना सत्र में प्राइवेट सेक्टर को रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश बढ़ाने की चुनौती दी है। उन्होंने साफ कहा कि यह निवेश सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का मजबूत आधार है। भारत का रक्षा सेक्टर अब हथियारों के बड़े आयातक से वैश्विक सप्लायर बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
एक्सपोर्ट और प्रोडक्शन के नए आंकड़े
वित्त वर्ष 2025-26 में डिफेंस इंडस्ट्री ने मील का पत्थर हासिल किया है। भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 62.66% अधिक है। इस दौरान कुल घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। सरकार का अगला फोकस प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को वर्तमान के 24% से 30% के स्तर से बढ़ाकर 50% तक पहुंचाना है।
इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार ने iDEX और ADITI जैसी स्कीम्स लॉन्च की हैं। साथ ही, डिफेंस R&D बजट का 25% हिस्सा विशेष रूप से प्राइवेट सेक्टर के लिए आरक्षित किया गया है, ताकि वे बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में आसानी से हिस्सा ले सकें।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है मार्केट का हाल?
डिफेंस सेक्टर की यह तेजी Nifty India Defence इंडेक्स और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत फोर्ज (Bharat Forge) जैसे शेयरों में साफ देखी जा सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के ग्रोथ के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। प्राइवेट कंपनियों पर ग्लोबल मानकों के अनुरूप अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने का दबाव है।
निवेशकों को अब इन बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन: बड़ी कंपनियां समय पर अपने ऑर्डर्स पूरे कर पा रही हैं या नहीं।
- कच्चे माल की लागत: रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुनाफे को प्रभावित कर सकता है।
- तकनीक को अपनाना: कंपनियां कितनी तेजी से नई तकनीक के साथ तालमेल बिठा रही हैं।
