Raghu Vamsi Aerospace का तेलंगाना में ₹600 करोड़ का सुपरअलॉय प्लांट, आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Raghu Vamsi Aerospace का तेलंगाना में ₹600 करोड़ का सुपरअलॉय प्लांट, आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी

Raghu Vamsi Aerospace Group, तेलंगाना में एक इंटीग्रेटेड सुपरअलॉय प्लांट बनाने के लिए ₹600 करोड़ से अधिक का निवेश करने जा रही है। इस प्लांट की सालाना क्षमता 5,000 टन होगी और इसका मकसद एयरोस्पेस और डिफेंस के लिए आयात होने वाले निकल-आधारित अलॉय पर भारत की निर्भरता को कम करना है। उत्पादन जनवरी 2028 से शुरू होने की उम्मीद है।

Detailed Coverage

50 एकड़ में लगेगा इंटीग्रेटेड प्लांट

Raghu Vamsi Aerospace Group ने तेलंगाना में 50 एकड़ ज़मीन पर एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए ₹600 करोड़ से ज़्यादा के निवेश की घोषणा की है। यह खुलासा Farnborough International Airshow 2026 में हुआ। यह प्लांट खास तौर पर निकल-आधारित सुपरअलॉय के उत्पादन पर फोकस करेगा, जो एयरो इंजन, स्पेस सिस्टम और डिफेंस इक्विपमेंट जैसे हाई-परफॉरमेंस एप्लीकेशन्स के लिए बेहद ज़रूरी हैं।

'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा

कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा इंटीग्रेटेड फैसिलिटी बनाना है जहाँ कई मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस एक ही छत के नीचे हो सकें। इनमें वैक्यूम मेल्टिंग, फोर्जिंग, हीट ट्रीटमेंट, वैक्यूम कास्टिंग और पाउडर मेथलर्जी जैसे प्रोसेस शामिल हैं। लगभग 5,000 टन की सालाना क्षमता के साथ, यह प्लांट सुपरअलॉय के विभिन्न रूप जैसे राउंड बार, वायर, फोर्जिंग और कास्टिंग का उत्पादन करेगा। इस प्रोडक्शन को लोकल लेवल पर लाकर, ग्रुप का मकसद भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को इन मटेरियल्स के लिए एक डोमेस्टिक सोर्स उपलब्ध कराना है, जिन्हें अभी तक बड़े पैमाने पर इंपोर्ट किया जाता है।

अनुभवी नेतृत्व

इस बड़े प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए कंपनी ने S.K. Jha को नियुक्त किया है। Jha, मिश्रा धातु निगम (Midhani) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं, जो डिफेंस और स्पेस सेक्टर में काम करने वाली एक स्पेशलाइज्ड मेटल कंपनी है। सुपरअलॉय प्रोडक्शन को संभालने का उनका अनुभव इस नए प्लांट की टेक्निकल ज़रूरतों को पूरा करने में अहम साबित होगा।

निवेशकों के लिए अहम बातें

इस नई फैसिलिटी में कमर्शियल प्रोडक्शन जनवरी 2028 से शुरू होने की उम्मीद है। एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर के लिए, सुपरअलॉय बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये अत्यधिक गर्मी और दबाव को झेल सकते हैं। हालांकि यह निवेश काफी बड़ा है, निवेशकों को कंपनी की इस बड़े प्रोजेक्ट को समय पर और बजट के अंदर पूरा करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए। इस प्लांट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह क्वालिटी और कॉस्ट दोनों के मामले में मौजूदा इंटरनेशनल सप्लायर्स को टक्कर दे पाता है या नहीं, साथ ही डोमेस्टिक डिफेंस और एयरोस्पेस प्रोग्राम्स से लगातार डिमांड बनी रहती है या नहीं।

चूंकि यह एक एक्सपेंशन प्रोजेक्ट है और इसका लीड टाइम लंबा है, इसलिए आने वाले सालों में स्टेकहोल्डर्स के लिए मुख्य मॉनिटरेबल्स कंस्ट्रक्शन फेज की प्रगति, एडवांस्ड मशीनरी की कमीशनिंग और इतने बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर के फाइनेंशियल बोझ को मैनेज करने की कंपनी की क्षमता होगी। इसके अतिरिक्त, कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि 2028 में प्लांट चालू होने के बाद हाई यूटिलाइजेशन बनाए रखने के लिए एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स से पर्याप्त लॉन्ग-टर्म ऑर्डर्स सिक्योर किए जाएं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.