भारतीय नौसेना ने INS Vikrant पर Rafale Marine जेट की पहली लैंडिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह **₹63,000 करोड़** के उस रक्षा समझौते का हिस्सा है, जिसके तहत **2030** तक पूरी फ्लीट को शामिल किया जाएगा और भारत में ही इसके मेंटेनेंस पर जोर दिया जाएगा।
भारतीय नौसेना ने 29 अक्टूबर 2026 को स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant के डेक पर Rafale Marine फाइटर जेट उतारकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह सफल लैंडिंग इस बात की पुष्टि करती है कि ये फ्रांसीसी लड़ाकू विमान भारत के अपने बनाए एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाने में सक्षम हैं। इससे पहले गोवा स्थित शोर-आधारित सुविधा में भी इसके सफल ट्रायल किए गए थे।
₹63,000 करोड़ की डील का इंडस्ट्रियल इम्पैक्ट
यह प्रोक्योरमेंट 28 अप्रैल 2025 को हुए ₹63,000 करोड़ के बड़े रक्षा सौदे का हिस्सा है। इस करार के तहत कुल 26 विमान खरीदे जाएंगे, जिनमें 22 सिंगल-सीट फाइटर्स और 4 ट्विन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह डील सिर्फ हार्डवेयर की खरीद नहीं है, बल्कि भारत में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कॉन्ट्रैक्ट में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तें शामिल हैं, जिसका सीधा फायदा भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों को मिलेगा। फ्यूजलेज (fuselage) से लेकर इंजन और सेंसर के मेंटेनेंस तक, अब भारत में ही विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम होगी और घरेलू कंपनियों के लिए लंबे समय तक रेवेन्यू के नए रास्ते खुलेंगे।
सेक्टर के लिए क्या हैं मॉनिटरेबल्स?
भले ही यह लैंडिंग एक बड़ा ऑपरेशनल माइलस्टोन है, लेकिन डिफेंस सेक्टर में निवेश करने वालों को इसकी लंबी अवधि की एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी चाहिए। चूँकि इंडक्शन का काम 2030 तक चलेगा, इसलिए इसका वित्तीय प्रभाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। भविष्य में स्थानीय प्रोडक्शन लाइन्स का सेटअप और MRO सुविधाओं की कुशलता ही यह तय करेगी कि यह डील भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए कितनी फायदेमंद साबित होती है।
