Pentagon का 'Project FORTRESS': अमेरिकी सैन्य ठिकानों की आत्मनिर्भरता पर बड़ा दांव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Pentagon का 'Project FORTRESS': अमेरिकी सैन्य ठिकानों की आत्मनिर्भरता पर बड़ा दांव

US Department of Defense ने 'Project FORTRESS' की शुरुआत की है, जिसके तहत सैन्य ठिकानों को किसी भी संकट के दौरान **90 दिनों** तक पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम बनाया जाएगा। यह कदम वैश्विक डिफेंस सप्लाई चेन के लिए एक बड़ा बदलाव है।

अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने अब सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपनी निर्भरता कम करने का फैसला किया है। 'Project FORTRESS' के जरिए मुख्य सैन्य ठिकानों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वे पानी, बिजली और लॉजिस्टिक्स के लिए बाहरी ग्रिड से पूरी तरह कटकर भी 90 दिनों तक सुरक्षित और क्रियाशील रह सकें।

नई टेक्नोलॉजी पर जोर

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पेंटागन पोर्टेबल न्यूक्लियर रिएक्टर्स, ग्रिड-स्केल बैटरी सिस्टम और ऑटोनॉमस माइक्रो-ग्रिड जैसी हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल करेगा। इसका सीधा मकसद है—सेना की कमांड को किसी भी बाहरी हमले या सिविल यूटिलिटी फेल्योर से बचाना।

सप्लाई चेन मॉडल में बदलाव

पेंटागन अब 'Just-in-Time' (न्यूनतम इन्वेंट्री) मॉडल से आगे बढ़कर 'Strategic Stockpiles' (सामरिक स्टॉक) की ओर बढ़ रहा है। युद्ध जैसी स्थिति में वैश्विक सप्लाई चेन पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए अब घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से बढ़ाने की तैयारी है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

रक्षा क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह 'Strategic Autonomy' (रणनीतिक स्वायत्तता) का दौर है। अब दुनिया भर की डिफेंस कंपनियां ग्लोबल सोर्सिंग के बजाय 'लोकल और हार्डेंड' सप्लाई चेन पर खर्च बढ़ाएंगी। भारत के डिफेंस कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य में उन कंपनियों की मांग बढ़ सकती है, जिनके पास इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने की महारत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.