Paras Defence and Space Technologies के शेयर सोमवार को काफी चढ़े। West Asia में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण डिफेंस सेक्टर्स के शेयरों में तेजी आना आम बात है, और इसी ट्रेंड का असर Paras Defence पर भी दिखा। दिन के कारोबार के दौरान, शेयर ₹631.00 से ₹645.45 के बीच रहा, जो बढ़ी हुई ट्रेडिंग एक्टिविटी को दर्शाता है।
लेकिन यह तेजी सिर्फ डिफेंस सेक्टर की वजह से नहीं थी। कंपनी ने उसी समय सेमीकंडक्टर के हाई-टेक क्षेत्र में भी कदम रखने का बड़ा ऐलान किया है। Paras Semiconductors Private Limited के गठन के साथ, कंपनी अब एडवांस्ड OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Testing) फैसिलिटीज स्थापित करने की योजना बना रही है। यह कदम डिफेंस के इवेंट-ड्रिवेन बिजनेस से बिल्कुल अलग, एक स्ट्रेटेजिक डाइवर्सिफिकेशन है। अब निवेशकों को कंपनी की दो अलग-अलग ग्रोथ स्टोरी को समझना होगा: एक तरफ डिफेंस सेक्टर की मजबूती और दूसरी तरफ सेमीकंडक्टर में लगाया गया दांव।
भारतीय डिफेंस सेक्टर को सरकार की नीतियों, बढ़ते बजट और भू-राजनीतिक मजबूरियों का फायदा मिल रहा है। 'मेक इन इंडिया' जैसे इनिशिएटिव और इंपोर्ट को कम करने पर जोर से डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य FY26 तक ₹1.75 लाख करोड़ और 2029 तक ₹3 लाख करोड़ का प्रोडक्शन हासिल करना है, साथ ही एक्सपोर्ट भी बढ़ाना है। हालांकि, इस सेक्टर का वैल्यूएशन थोड़ा खिंचा हुआ लग रहा है। Nifty India Defence Index 52.05 के पीई रेशियो (PE Ratio) पर ट्रेड कर रहा है।
Paras Defence का अपना पीई रेशियो लगभग 70x से 72x के आसपास है, जो इंडस्ट्री के मुकाबले थोड़ा महंगा है। इसकी तुलना में, Bharat Electronics Limited (BEL) का पीई 35x से 57.25x और Hindustan Aeronautics Limited (HAL) का पीई लगभग 25-30x है। इंडस्ट्री के एवरेज 54.2x से Paras Defence का वैल्यूएशन ज्यादा है, लेकिन कुछ हाई-ग्रोथ कंपनियों की तुलना में यह बेहतर दिख सकता है।
सेमीकंडक्टर की दुनिया में Paras Defence का मुकाबला काफी अलग है। ग्लोबल OSAT मार्केट, जो 2024 में लगभग $66.1 बिलियन का था, 2031 तक 5.2% की CAGR से बढ़कर $93.8 बिलियन होने का अनुमान है। इस मार्केट पर मुख्य रूप से ताइवान और चीन की बड़ी कंपनियों का दबदबा है, जिनमें ASE Technology Holding की 44.6% मार्केट शेयर है। यह सेक्टर तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी, भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट और तगड़ी ग्लोबल कॉम्पिटिशन के लिए जाना जाता है। भारत में OSAT कैपेबिलिटी अभी शुरुआती दौर में है, खासकर हाई-रिलायबिलिटी एप्लीकेशंस के लिए, इसलिए Paras Defence के लिए यह एंट्री एक बड़ी चुनौती है।
Paras Defence के 70x जैसे हाई पीई पर वैल्यूएशन पर सवाल उठते हैं, खासकर तब जब पिछले तीन सालों का कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) सिर्फ 11.5% रहा है। शेयर में काफी उतार-चढ़ाव भी देखा गया है; 52-हफ्ते की रेंज ₹401.00 से ₹972.50 रही है। सेमीकंडक्टर वेंचर में एंट्री अच्छी बात है, पर यह ग्लोबल मार्केट में एंटर कर रहा है जहां पहले से स्थापित खिलाड़ी मौजूद हैं। इससे एग्जीक्यूशन और स्केल-अप में रिस्क है। हैवी कैपिटल आउटले, टेक्नोलॉजी का तेजी से पुराना हो जाना और प्राइसिंग प्रेशर प्रॉफिटेबिलिटी को रोक सकते हैं। साथ ही, डिफेंस बिजनेस का प्रदर्शन सीधे तौर पर भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करता है, जिससे अचानक गिरावट का खतरा बना रहता है।
हाल ही में, Paras Defence ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में ₹106.4 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹18.2 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को दिखाता है। एनालिस्ट कवरेज अभी सीमित है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक, एक साल का टारगेट प्राइस ₹920.00 तक जा सकता है। कंपनी का लक्ष्य डिफेंस और स्पेस में अपनी मौजूदा विशेषज्ञता का इस्तेमाल एडवांस्ड सेमीकंडक्टर पैकेजिंग में करना है। यह भारत की क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ भी जुड़ा हुआ है। डिफेंस सेक्टर में लगातार पॉजिटिव मोमेंटम और सेमीकंडक्टर में कंपनी की महत्वाकांक्षी पहल एक जटिल लेकिन फायदेमंद रास्ते का संकेत देती है, जो प्रभावी एग्जीक्यूशन और मार्केट की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा।