Drone Federation of India (DFI) ने खुलासा किया है कि भारत में **50,000** से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन वाले ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है। इम्पोर्ट नियमों में हेरफेर के जरिए आ रहे ये ड्रोन न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि घरेलू कंपनियों के कारोबार पर भी बुरा असर डाल रहे हैं।
नियम और कानून का उल्लंघन
Drone Federation of India (DFI) के मुताबिक, ये ड्रोन मुख्य रूप से 'खिलौने' वाली कैटेगरी यानी HSN कोड 9503 के तहत गलत तरीके से इंपोर्ट किए जा रहे हैं। जबकि कमर्शियल ड्रोन के लिए HSN कोड 8806 के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इस लूपहोल का फायदा उठाकर कंपनियां बिना किसी सेफ्टी टेस्टिंग के अवैध ड्रोन भारतीय बाजार में खपा रही हैं।
घरेलू कंपनियों के लिए चुनौती
यह 'ग्रे मार्केट' उन भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है जो सरकारी मानकों का पालन करते हुए भारी निवेश कर रहे हैं। DFI का कहना है कि विदेशों से पुर्जे लाकर उन्हें भारत में असेंबल किया जा रहा है, जिससे वे घरेलू खिलाड़ियों के मुकाबले सस्ते दामों पर बिक रहे हैं। इससे उन कंपनियों की प्राइसिंग पावर पर असर पड़ रहा है जो 'मेक इन इंडिया' के तहत सर्टिफाइड ड्रोन बना रही हैं।
सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
सिर्फ कारोबार ही नहीं, सुरक्षा के लिहाज से भी यह एक गंभीर मुद्दा है। इन अवैध ड्रोन्स में अक्सर ऊंचाई या रेंज की पाबंदी नहीं होती, जिससे ये एयरपोर्ट और डिफेंस इलाकों के लिए खतरा बन सकते हैं। साथ ही, इनमें साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल न होने के कारण डेटा चोरी का डर भी बना रहता है।
सरकार से क्या मांग की जा रही है?
DFI ने सरकार से कड़ी मांग की है कि:
- 50% स्वदेशी कंटेंट अनिवार्य किया जाए।
- अवैध ड्रोन्स और उनके रिसेलर्स पर भारी जुर्माना और सख्त कार्रवाई हो।
- ड्रोन के मुख्य पुर्जों, जैसे फ्लाइट कंट्रोलर और एवियोनिक्स पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जाए।
निवेशकों के लिए यह सेक्टर अब नजर रखने लायक है, क्योंकि यदि सरकार सख्त नियमों को लागू करती है, तो इससे सर्टिफाइड घरेलू कंपनियों को बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा मौका मिलेगा।
