बेंगलुरु स्थित स्पेसटेक स्टार्टअप OXG Space ने अपने 'मिशन सिनेप्स' (Mission Synapse) के लिए **₹17 करोड़** की फंडिंग जुटाई है। यह स्टार्टअप अब अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस करने की नई तकनीक पर काम करेगा, जिससे ग्राउंड स्टेशन की देरी खत्म होगी।
बेंगलुरु बेस्ड स्पेसटेक स्टार्टअप OXG Space ने अपनी नई फंडिंग राउंड में ₹17 करोड़ जुटाए हैं। इस राउंड को Aum Ventures के India Innovation Fund II ने लीड किया है। इसके अलावा, Skyroot Aerospace के को-फाउंडर्स पवन कुमार चंदना, भरत डाका और Cosmoserve के फाउंडर चिरन फनिंद्र जैसे इंडस्ट्री दिग्गजों ने भी इसमें निवेश किया है।
मिशन सिनेप्स (Mission Synapse) की तैयारी
इस नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी के 12 महीने के 'मिशन सिनेप्स' को तेज करने में किया जाएगा। कंपनी का मुख्य लक्ष्य 'इन-ऑर्बिट एज कंप्यूटिंग' (In-orbit edge computing) तकनीक का सफल प्रदर्शन करना है।
इस स्टार्टअप की कमान ISRO के पूर्व इंजीनियर आकाश शेट्टी और संजय गोरुर संभाल रहे हैं। अभी दिक्कत यह है कि सैटेलाइट्स डेटा को ऑर्बिट में प्रोसेस नहीं कर सकते; उन्हें इमेज स्टोर करके ग्राउंड स्टेशन का इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे डेटा की वैल्यू कम हो जाती है।
स्पेस में 'सेल टावर' जैसी तकनीक
OXG Space ऐसी तकनीक पर काम कर रही है जिसे वे 'अंतरिक्ष में एज सेल टावर' कह रहे हैं। इसकी मुख्य तकनीक में Ka-band phased-array antenna का उपयोग होगा, जिसकी क्षमता 1 Gbps से शुरू होकर 64 Gbps प्रति स्पेसक्राफ्ट तक ले जाने की योजना है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
फिलहाल, OXG Space एक प्राइवेट कंपनी है और यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। डीपटेक सेक्टर की तरह, इस स्टार्टअप के सामने भी बड़े जोखिम हैं—चाहे वह अंतरिक्ष के कठोर माहौल में हार्डवेयर का सफल संचालन हो या ग्लोबल प्लेयर्स से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा। आने वाले 12 महीनों में 'मिशन सिनेप्स' का प्रदर्शन ही तय करेगा कि यह तकनीक कमर्शियल रूप से कितनी सफल होगी।
