हालिया रिसर्च में पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के गुरुत्वाकर्षण रास्तों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। इस बदलाव से Space Domain Awareness (SDA) टेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस डिफेंस सेक्टर में सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
Northwestern Polytechnical University की एक हालिया स्टडी ने पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के क्षेत्र, जिसे 'सिसलूनर' (Cislunar) स्पेस कहा जाता है, की रणनीतिक अहमियत पर बड़ा खुलासा किया है। रिसर्च के अनुसार, यहाँ मौजूद गुरुत्वाकर्षण के रास्तों का इस्तेमाल मिलिट्री और सर्विलांस के लिए 'चोक पॉइंट्स' (Choke Points) की तरह किया जा सकता है। इससे महाशक्तियां बिना किसी सीधे युद्ध के, अपने प्रतिद्वंद्वी के मिशन को ट्रैक या ब्लॉक कर सकती हैं।
एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए नया शिफ्ट
अब ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री का पूरा जोर 'Space Domain Awareness' पर शिफ्ट हो रहा है। पहले मिशन सिर्फ चंद्रमा या मंगल तक पहुंचने पर केंद्रित थे, लेकिन अब लक्ष्य इस विशाल क्षेत्र में हो रही हलचल पर नजर रखने का है। इससे रडार ट्रैकिंग, सैटेलाइट टेलीमेट्री और एडवांस्ड प्रोपल्शन बनाने वाली कंपनियों के लिए 100% सरकारी बजट में इजाफा होने की उम्मीद है। U.S. Artemis प्रोग्राम और U.S. Space Force जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पहले ही इस दिशा में काम कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks for Investors)
हालाँकि, यहाँ बड़े जोखिम भी हैं। सिसलूनर स्पेस के लिए अभी कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है। यदि प्रमुख देश इन रास्तों पर अपना कब्जा जमाने की कोशिश करते हैं, तो मिशन में देरी और कमर्शियल स्पेसक्राफ्ट के लिए नेविगेशन का खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही, इन जटिल ज़ोन के लिए सिस्टम डेवलप करने की लागत काफी ज्यादा है। ऐसे में डिफेंस प्रोजेक्ट्स का बजट अक्सर 20% से 50% तक ऊपर जा सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में सरकारी प्रोक्योरमेंट साइकिल्स और स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े नियमों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
