Boeing Starliner: तकनीकी दिक्कतों के बावजूद NASA की नजर 10 और मिशन पर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Boeing Starliner: तकनीकी दिक्कतों के बावजूद NASA की नजर 10 और मिशन पर

NASA अंतरिक्ष यात्रा में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए Boeing के साथ 10 नए Starliner मिशन पर बातचीत कर रही है। हालांकि, तकनीकी खामियों और SpaceX पर बढ़ती निर्भरता के चलते कंपनी के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।

स्पेस सेक्टर में बढ़ती हलचल

NASA एक ऐसे रोडमैप पर काम कर रही है जिसके तहत भविष्य में Boeing के Starliner स्पेसक्राफ्ट से 10 या उससे ज्यादा मिशन लॉन्च किए जा सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक एस्ट्रोनॉट्स को भेजने के लिए केवल एक कंपनी पर निर्भर न रहना और बाजार में प्रतिस्पर्धा को जिंदा रखना है।

ऑपरेशनल और फाइनेंशियल चुनौतियां

निवेशकों के लिए Starliner का भविष्य अभी कई ऑपरेशनल बाधाओं से घिरा है। हाल ही में क्रू टेस्ट फ्लाइट के दौरान थ्रस्टर में आई तकनीकी खराबी के कारण यान को बिना क्रू के धरती पर लौटना पड़ा। एस्ट्रोनॉट्स Butch Wilmore और Suni Williams को अंततः SpaceX के Crew Dragon से सुरक्षित वापस लाया गया। यह घटना Boeing के लिए एक बड़ा झटका है।

वित्तीय मोर्चे पर, यह एक 'फिक्स्ड-प्राइस' कॉन्ट्रैक्ट है, जिसका मतलब है कि किसी भी तरह की देरी या तकनीकी ओवररन का पूरा खर्च Boeing को उठाना पड़ेगा। इससे कंपनी के डिफेंस, स्पेस और सिक्योरिटी डिवीजन के मार्जिन पर गहरा असर पड़ रहा है।

क्या SpaceX बाजी मार ले गई?

वर्तमान में लो अर्थ ऑर्बिट में SpaceX का पलड़ा भारी है। NASA ने Elon Musk की कंपनी SpaceX को $946 मिलियन का एक नया कॉन्ट्रैक्ट दिया है, जिसके तहत 3 और क्रू मिशन 2030 तक पूरे किए जाएंगे। अब देखना यह है कि क्या Boeing अपनी तकनीकी खामियों को दूर कर खुद को एक भरोसेमंद खिलाड़ी के तौर पर फिर से साबित कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.