इटली से रक्षा आयात में भारी गिरावट
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत के कुल रक्षा आयात में इटली का योगदान तेजी से गिरा है। 2008-2013 के बीच यह हिस्सेदारी 1.7% थी, जो 2020-2025 की अवधि में घटकर महज 0.4% रह गई। इस गिरावट की मुख्य वजह इटली से युद्धपोतों के आयात में आई भारी कमी है।
नौसैनिक सिस्टम में पिछड़ रहा इटली
कभी इटली भारत को नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स का एक बड़ा सप्लायर हुआ करता था। 2008-2013 के दौरान भारत के शिप इंपोर्ट में इटली की हिस्सेदारी 8.3% थी, जो अब लगभग शून्य हो गई है। यह इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि युद्धपोत भारत के रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा होते हैं और इटली के रक्षा निर्यात में भी इनका बड़ा योगदान है। 2008-2013 में इटली के ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट में नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा 23% था, जो 2020-2025 में बढ़कर 46% हो गया।
सहयोग के नए रास्ते
इन सबके बावजूद, इटली अभी भी विशेष नौसैनिक सिस्टम्स का सप्लायर बना हुआ है। 2020-2025 में भारत के नौसैनिक हथियारों के आयात में इटली की 16.5% हिस्सेदारी है, और सेंसर्स के आयात में भी इसका योगदान है। यह भारत और इटली के बीच युद्धपोतों, मिसाइल इंटीग्रेशन, नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, तोपखाने और वायु रक्षा प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलता है। यह भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करेगा और यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को मजबूत करेगा।
