Ministry of Defence ने पुणे की Accurate Industrial Controls के साथ ₹586 करोड़ का बड़ा करार किया है। यह डील T-72 और T-90 टैंकों के लिए Auxiliary Power Units (APUs) बनाने के लिए की गई है।
सौदे की पूरी जानकारी
रक्षा मंत्रालय ने पुणे की कंपनी Accurate Industrial Controls Private Ltd (AICPL) के साथ ₹586 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट फाइनल किया है। यह डील भारतीय सेना के T-72 और T-90 मेन बैटल टैंकों के लिए एडवांस्ड Auxiliary Power Units (APUs) की आपूर्ति को कवर करती है।
टैंकों की क्षमता में कैसे होगा सुधार?
APU एक तरह का सेकेंडरी पावर सोर्स है, जो मुख्य इंजन बंद होने पर भी टैंक के फायर कंट्रोल सिस्टम, गन स्टेबलाइजेशन और फायरिंग सर्किट को चालू रखता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे टैंक का थर्मल सिग्नेचर कम हो जाता है, जो युद्ध के मैदान में स्टेल्थ (Stealth) के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा, यह फ्यूल की बचत करने में भी मददगार है।
ये यूनिट्स -50°C की कड़ाके की ठंड से लेकर 45°C तक के रेगिस्तानी तापमान में काम करने के लिए बनाई गई हैं। प्रत्येक यूनिट 10 से 12 किलोवाट बिजली पैदा करती है, जिससे टैंक लंबे समय तक स्टैंडबाय मोड में भी पूरी तरह 'कॉम्बैट रेडी' बने रहते हैं।
'आत्मनिर्भर भारत' की ओर बड़ा कदम
यह खरीद सरकार की 'Make-II' पहल का हिस्सा है। घरेलू कंपनी को ठेका देकर सरकार रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, यह ऑर्डर बताता है कि सरकार अब जटिल सब-सिस्टम्स के लिए भी निजी भारतीय कंपनियों पर भरोसा जता रही है।
