Mahindra & Mahindra ने अपने सब्सिडियरी Novavaayu Aerospace में **51%** हिस्सेदारी ब्राजील की दिग्गज कंपनी Embraer को बेचने का करार किया है। यह डील **₹5.1 लाख** में हुई है, जिसका मकसद भारत में C-390 Millennium विमानों का निर्माण करना है।
Mahindra & Mahindra Ltd ने रक्षा क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। कंपनी ने अपनी नई यूनिट Novavaayu Aerospace Ltd में 51% स्टेक ब्राजील की कंपनी Embraer S.A. को बेचने का ऐलान किया है। ₹5.1 लाख की यह डील भविष्य में डिफेंस सेक्टर में कंपनी की बड़ी भूमिका तय कर सकती है।
इस साझेदारी का असली मकसद
इस जॉइंट वेंचर का मुख्य उद्देश्य Embraer के C-390 Millennium ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को भारत में ही मैन्युफैक्चर करना है। Mahindra इसके जरिए भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के 'मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट' प्रोग्राम में एक मजबूत दावेदार के रूप में सामने आना चाहती है। अगर प्रोजेक्ट सफल होता है, तो नागपुर में फाइनल असेंबली यूनिट लगाने की योजना है।
निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
Novavaayu Aerospace को जुलाई 2026 में बनाया गया था, जो अभी अपने शुरुआती दौर में है। इसका कोई पिछला रेवेन्यू ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए ₹5.1 लाख का वैल्यूएशन केवल शुरुआती कैपिटल स्ट्रक्चर को दिखाता है। इस डील के बाद Novavaayu एक होली-ओन्ड सब्सिडियरी से बदलकर Mahindra Defence Systems की एसोसिएट कंपनी बन जाएगी।
सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर टिकी है नजरें
इस वेंचर की सफलता पूरी तरह से सरकारी प्रोक्योरमेंट पर निर्भर है। अगर भारतीय वायुसेना किसी दूसरे दावेदार को यह डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट देती है, तो इस वेंचर की कमाई और स्केल पर बड़ा असर पड़ सकता है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में सरकारी ऑर्डर ही कंपनी के रेवेन्यू का सबसे बड़ा जरिया होते हैं।
यह ट्रांजेक्शन 1 दिसंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह है कि वे भारतीय वायुसेना के फैसले पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि यही इस पार्टनरशिप की भविष्य की राह तय करेगा।
