Mahindra Group और Embraer ने इंडियन एयर फोर्स (IAF) के **60** विमानों के टेंडर को जीतने की स्थिति में नागपुर को अपना असेंबली बेस बनाने की योजना बनाई है। **₹1 लाख करोड़** के इस बड़े कॉन्ट्रैक्ट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है, जबकि बाजार में सुस्ती के बीच Mahindra & Mahindra के शेयरों में **3.06%** की गिरावट दर्ज की गई है।
नागपुर बनेगा एयरोस्पेस हब?
Mahindra Group और ब्राजील की कंपनी Embraer ने C-390 मिलेनियम मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए नागपुर को संभावित मैन्युफैक्चरिंग साइट के रूप में चुना है। हालांकि, यह प्लान पूरी तरह से एक शर्त पर टिका है: कंपनी को भारतीय वायुसेना (IAF) के 'मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट' (MTA) प्रोग्राम का टेंडर जीतना होगा। वायुसेना को अपनी पुरानी फ्लीट को अपडेट करने के लिए 60 नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की जरूरत है।
टेंडर की जंग और चुनौतियां
यह प्रोजेक्ट करीब ₹1 लाख करोड़ का है, जो 'मेक इन इंडिया' के तहत Mahindra के लिए डिफेंस सेक्टर में बड़ी छलांग साबित हो सकता है। लेकिन राह आसान नहीं है। Embraer को कड़ी टक्कर मिल रही है, जिसमें Tata-Lockheed Martin (C-130J के साथ) और Airbus जैसे ग्लोबल दिग्गज मैदान में हैं। एयरफोर्स का फैसला टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, परफॉरमेंस और कीमत के आधार पर होगा।
बाजार का हाल और निवेशकों के लिए संकेत
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को Mahindra & Mahindra के शेयर ₹2,860 पर बंद हुए। शेयर में आई 3.06% की गिरावट मुख्य रूप से सेल्स नतीजों और मार्केट ट्रेंड्स के कारण है, न कि इस खबर से। निवेशकों को यह समझना होगा कि डिफेंस ऑर्डर एक लॉन्ग-टर्म ट्रिगर है, लेकिन कंपनी का स्टॉक अभी भी उसके मुख्य ऑटो और ट्रैक्टर बिजनेस से अधिक प्रभावित होता है।
आगे क्या होगा?
मिलिट्री एयरोस्पेस का काम अत्यधिक सटीक इंजीनियरिंग की मांग करता है। यदि यह ज्वाइंट वेंचर टेंडर नहीं जीतता है, तो नागपुर में निवेश की योजना ठंडे बस्ते में जा सकती है। साथ ही, सरकारी टेंडर की प्रक्रिया में अक्सर देरी की संभावना बनी रहती है। फिलहाल, निवेशकों को IAF की टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी मूल्यांकन पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि यही इस वेंचर का असली भविष्य तय करेगा।
