Lohia Aerospace का बड़ा दांव: कानपुर में $10 मिलियन का 3D प्रिंटिंग प्लांट, डिफेंस सेक्टर में क्रांति!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Lohia Aerospace का बड़ा दांव: कानपुर में $10 मिलियन का 3D प्रिंटिंग प्लांट, डिफेंस सेक्टर में क्रांति!

Lohia Aerospace Systems ने इजराइल की Massivit के साथ हाथ मिलाया है। दोनों मिलकर कानपुर में भारत की पहली लार्ज-फॉर्मेट 3D प्रिंटिंग फैसिलिटी शुरू करेंगे, जो खास तौर पर एयरोस्पेस कंपोनेंट्स के लिए होगी। इस $8-10 मिलियन के निवेश से मैन्युफैक्चरिंग टाइम **90%** तक कम होगा और इंपोर्टेड टूल्स पर निर्भरता घटेगी, जिससे घरेलू डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

कानपुर में खुला भारत का पहला 3D प्रिंटिंग हब

Lohia Aerospace Systems और इजरायल की कंपनी Massivit ने मिलकर एक बड़ी डील की है। दोनों भारत में एडवांस्ड लार्ज-फॉर्मेट 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी लाने के लिए साथ आए हैं। यह पार्टनरशिप कानपुर में Lohia के प्लांट में ही एक खास मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करेगी। यह कदम भारत में एयरोस्पेस पार्ट्स और कंपोजिट टूल्स के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कहां कितना होगा निवेश?

कंपनी अगले 12 से 24 महीनों में इस नई मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म को सेट करने के लिए $8 मिलियन से $10 मिलियन (लगभग ₹66 करोड़ से ₹83 करोड़) का निवेश करने का प्लान बना रही है। इस एक्सपेंशन के तहत, Lohia Aerospace कानपुर में अपनी मैन्युफैक्चरिंग स्पेस को भी बढ़ा रहा है। वे 80,000 स्क्वायर फुट के मौजूदा प्लांट के साथ 250,000 स्क्वायर फुट की नई फैसिलिटी जोड़ेंगे। शुरुआत में, कंपनी 8 से 10 लार्ज-फॉर्मेट 3D प्रिंटर्स लगाएगी। हर प्रिंटर एक दिन में एक से दो टूल सेट तैयार कर सकेगा। इस पूरे ऑपरेशन से रीजन में 60 से 100 नई स्किल्ड जॉब्स पैदा होने की उम्मीद है।

टेक्नोलॉजी से मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव

लार्ज-फॉर्मेट एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग को अपनाने का मकसद भारत के कंपोजिट प्रोडक्शन इंडस्ट्री में चल रही मैन्युअल प्रक्रियाओं को बदलना है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, Lohia Aerospace को उम्मीद है कि मोल्ड्स और टूल्स के प्रोडक्शन साइकिल में लगने वाला कई हफ्तों का समय घटकर कुछ दिन रह जाएगा। इस बदलाव से मैन्युफैक्चरिंग टाइम 90% तक कम होने और ग्राहकों के लिए फाइनल कॉस्ट में 50% तक की कमी आने की संभावना है। कंपनी ने खास तौर पर भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर के लिए इस टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के एक्सक्लूसिव राइट्स हासिल कर लिए हैं। इसमें मैन-मेड एयरक्राफ्ट और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (ड्रोन) दोनों के लिए एप्लीकेशन्स शामिल हैं।

मार्केट का माहौल और कंपनी के लक्ष्य

यह पार्टनरशिप भारत के एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 'आत्मनिर्भर भारत' के मिशन के साथ मेल खाती है। बड़े टूल्स का डोमेस्टिक प्रोडक्शन करके, Lohia Aerospace इंपोर्टेड टूल्स पर मौजूदा निर्भरता को खत्म करना चाहता है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिटी कंट्रोल और फिनिशिंग सहित पूरी वैल्यू चेन को मैनेज करेगी। इसके लिए वह AS9100D और NADCAP जैसी अपनी मौजूदा इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन्स का फायदा उठाएगी। जैसे-जैसे फैसिलिटी बड़ेगी, इसका फाइनेंशियल इंपैक्ट कंपनी की नई प्रिंटिंग कैपेसिटी के हाई यूटिलाइजेशन रेट को बनाए रखने और अन्य कंपोजिट मैन्युफैक्चरर्स से डिमांड को स्टेबल ऑर्डर फ्लो में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगा। यह प्रोजेक्ट डोमेस्टिक एयरोस्पेस सप्लाई चेन में चल रहे कैपिटल स्पेंडिंग ट्रेंड का एक उदाहरण है, क्योंकि कंपनियां बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स जीतने के लिए अपनी टेक्निकल क्षमताओं को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं। निवेशकों को प्रोजेक्ट के कमीशनिंग टाइमलाइन, फुल कैपेसिटी यूटिलाइजेशन की स्पीड और यह टेक्नोलॉजी असल कमर्शियल और डिफेंस सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स में इंपोर्टेड टूलिंग को कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाती है, इस पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.