Airwars की एक हालिया रिपोर्ट में फरवरी 2026 में ईरान के Lamerd में हुए हमले के लिए Lockheed Martin की Precision Strike Missile (PrSM) को जिम्मेदार बताया गया है। इस हमले में **21** नागरिकों की जान गई थी, जिससे अब हथियारों के इस्तेमाल और डिफेंस कंपनियों पर वैश्विक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
हमले की गंभीरता और विवाद
फरवरी 28, 2026 को ईरान के Lamerd में हुए सैन्य हमले में 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 7 बच्चे भी शामिल थे। एयरवार्स (Airwars) की जांच में मिले मलबे के निशान सीधे तौर पर Lockheed Martin की प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को स्वीकार किया है, लेकिन नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है।
डिफेंस सेक्टर के लिए जोखिम
यह घटना अब उन डिफेंस कंपनियों के लिए रेगुलेटरी और साख (reputational) से जुड़े सवाल खड़े कर रही है जो 'वाइड-इफेक्ट' हथियारों का निर्माण करती हैं। PrSM सिस्टम हवा में फटने के बाद हजारों धातु के टुकड़ों (metal pellets) को छोड़ता है, जो घनी आबादी वाले इलाकों में भारी तबाही का कारण बन सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे डिफेंस सेक्टर में कानूनी और मानवीय स्तर पर दबाव बढ़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट और भारतीय निवेशकों पर असर
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव को लेकर है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया भर में तेल की आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता है। किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ता है। भारतीय बाजार के लिए यह चिंताजनक है क्योंकि इससे कच्चे तेल के आयात का खर्च बढ़ सकता है और मुद्रा पर दबाव बन सकता है।
फिलहाल, मार्केट पार्टिसिपेंट्स को इस बात पर नजर रखनी होगी कि कैसे यह भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव सप्लाई चेन, कमोडिटी कीमतों और भविष्य के रेगुलेटरी नियमों को प्रभावित करता है।
