Space Market: कर्नाटक का बड़ा दांव, भारत के **$22 अरब** के स्पेस मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Space Market: कर्नाटक का बड़ा दांव, भारत के **$22 अरब** के स्पेस मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी

कर्नाटक ने अपनी नई 'स्पेस टेक्नोलॉजी पॉलिसी 2025-30' लॉन्च कर दी है। राज्य का लक्ष्य 2034 तक भारत के **$22 अरब** के स्पेस मार्केट में **50%** हिस्सेदारी हासिल करना है। बेंगलुरु के पास खास मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनाए जाएंगे और कंपनियों को भारी सब्सिडी दी जाएगी।

कर्नाटक अब भारत के तेजी से बढ़ते स्पेस सेक्टर का केंद्र बनने की राह पर है। नई पॉलिसी के तहत सरकार का इरादा केवल रिसर्च तक सीमित न रहकर, हाई-वॉल्यूम कमर्शियल प्रोडक्शन और सैटेलाइट सर्विसेज में अपनी धाक जमाने का है।

निवेश के लिए आकर्षक प्रोत्साहन (Incentives)

राज्य सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए एक ठोस ढांचा तैयार किया है:

  • सब्सिडी: प्लांट, मशीनरी और जमीन की लागत पर 20% से 25% तक की सब्सिडी दी जाएगी।
  • इकोसिस्टम: बेंगलुरु के पास 'प्लग-एंड-प्ले' मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जहां स्टार्टअप्स, MSME और बड़ी कंपनियां एक साथ मिलकर स्पेस हार्डवेयर की असेंबली और टेस्टिंग कर सकेंगी।
  • लक्ष्य: इस नीति के जरिए सरकार $3 अरब से $5 अरब तक का निवेश जुटाना चाहती है। साथ ही, 500 से ज्यादा स्टार्टअप्स को सपोर्ट और 50,000 प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग देने का प्लान है।

निवेशकों के लिए चेतावनी और चुनौतियां

हालांकि यह पॉलिसी एक मजबूत ढांचा देती है, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों पर नजर रखनी चाहिए:

  1. कड़ी प्रतिस्पर्धा: तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात जैसे राज्य भी अपनी स्पेस नीतियों के जरिए निवेश खींचने की होड़ में हैं।
  2. एक्जीक्यूशन रिस्क: स्पेस पार्क का समय पर निर्माण और MSME का प्रोटोटाइप से कमर्शियल प्रोडक्शन में सफल ट्रांजिशन इस योजना की कामयाबी तय करेगा।

आने वाले समय में उन कंपनियों पर नजर रखें जो इन नए मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स का लाभ उठाती हैं और सरकारी इंसेंटिव्स का फायदा उठाना शुरू करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.