Jabalpur Facility: T-90 टैंकों की मरम्मत के लिए **₹472 करोड़** का नया प्लांट, डिफेंस सेक्टर में बड़ा बूस्ट

AEROSPACE-DEFENSE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Jabalpur Facility: T-90 टैंकों की मरम्मत के लिए **₹472 करोड़** का नया प्लांट, डिफेंस सेक्टर में बड़ा बूस्ट

रक्षा मंत्रालय ने जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री में **₹472 करोड़** की लागत से एक नई ओवरहॉलिंग यूनिट का शिलान्यास किया है। यह फैसिलिटी हर साल **80** T-72 और T-90 बैटल टैंकों की मरम्मत करेगी, जिससे भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता में इजाफा होगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री (VFJ) में इस नई यूनिट की आधारशिला रखी है। अभी तक भारतीय सेना को अपनी युद्धक क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल 230 टैंकों की मरम्मत की जरूरत होती है, जबकि चेन्नई स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री की क्षमता केवल 150 यूनिट्स तक सीमित थी। यह नया प्लांट उस 80 टैंकों के अंतर को पाट देगा।

डिफेंस सेक्टर और निवेशकों के लिए संकेत

हालांकि Armoured Vehicles Nigam Limited (AVNL) एक सरकारी PSU है और अभी लिस्टेड नहीं है, लेकिन इस प्रोजेक्ट का असर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पर गहरा होगा। 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत यह कदम डिफेंस क्षेत्र से जुड़े MSMEs और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा करेगा, जो टैंकों के पुर्जे और इंजीनियरिंग सेवाएं मुहैया कराते हैं।

बाजार के लिए क्या है रिस्क और रिवॉर्ड?

निवेशकों को इस सेक्टर पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि डिफेंस कंपनियों के लिए लगातार ऑर्डर और मेंटेनेंस का काम आ रहा है। हालांकि, बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई चेन की जटिलताएं, 1,200 से ज्यादा छोटी कंपनियों पर निर्भरता और प्रोजेक्ट डिले का जोखिम हमेशा बना रहता है।

अगले कुछ महीनों में इस फैसिलिटी का कंस्ट्रक्शन और कमीशनिंग टाइमलाइन ही यह तय करेगा कि भारत का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग ढांचा कितनी तेजी से बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.