तेज खरीद से भारतीय ड्रोन कंपनियों को बल
भारत के रक्षा खरीद (Defence Procurement) के तरीके में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। गुजरात की कंपनी InsideFPV ने रक्षा मंत्रालय (MoD) के लिए ₹10 करोड़ के कामिकाजी ड्रोन का एक बड़ा ऑर्डर सिर्फ दो महीने के अंदर पूरा कर दिया है। यह कमाल इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट रूट (EPR) के जरिए हुआ है। इस तेज डिलीवरी से न सिर्फ InsideFPV की प्रोडक्शन क्षमता साबित होती है, बल्कि यह भी दिखाता है कि रक्षा मंत्रालय अब अपनी जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए खरीद प्रक्रिया को काफी तेज कर रहा है। EPR का इस्तेमाल पहले भी बड़े रक्षा सौदों के लिए किया गया है, जिनकी कीमत सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपये रही है। InsideFPV का यह प्रदर्शन बताता है कि भारत की प्राइवेट डिफेंस कंपनियां अब सेना की सख्त समय-सीमाओं को भरोसेमंद तरीके से पूरा करने में सक्षम हैं।
InsideFPV के ड्रोन: कठिन और GPS-रहित इलाकों के लिए तैयार
InsideFPV के कामिकाजी ड्रोन खास तौर पर भारतीय सेना के सामने आने वाली कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार किए गए हैं, न कि आम ड्रोन की तरह। ये उन इलाकों में भी भरोसेमंद तरीके से काम करते हैं जहां GPS सिग्नल जाम हो जाते हैं या उपलब्ध नहीं होते। साथ ही, ये -35°C से लेकर 50°C तक के भीषण तापमान को झेलने में भी सक्षम हैं। ऐसे मुश्किल माहौल में काम करने की यह क्षमता InsideFPV को रक्षा ड्रोन मार्केट में एक खास जगह दिलाती है। कंपनी ने हाल ही में जनवरी 2026 में GVFL की अगुवाई में एक प्री-सीरीज A फंडिंग राउंड में ₹6 करोड़ जुटाए थे, जिससे कंपनी की कुल फंडिंग $1.81 मिलियन हो गई है। इस भरोसे के दम पर कंपनी 20,000 वर्ग फुट की बड़ी फैसिलिटी में विस्तार करने की योजना बना रही है ताकि वह बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स को संभाल सके।
'मेक इन इंडिया' डिफेंस टेक को बढ़ावा
यह कॉन्ट्रैक्ट सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहलों का एक बड़ा उदाहरण है। इसका मकसद देश में रक्षा सामानों के निर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत का डिफेंस टेक सेक्टर तेजी से उभर रहा है। अनुमान है कि 2025 में $7.6 बिलियन का यह बाजार 2030 तक $19 बिलियन तक पहुंच जाएगा, यानी करीब 20% की सालाना ग्रोथ। इसमें मिलिट्री ड्रोन मार्केट का अहम योगदान है, जिसके $1.55 बिलियन (2024) से बढ़कर $5.5 बिलियन (2032) तक पहुंचने का अनुमान है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी सरकारी स्कीमें और ड्रोन आयात पर लगी पाबंदियां घरेलू उत्पादन को और बढ़ावा दे रही हैं। देश की अन्य कंपनियां भी बड़े सौदे जीत रही हैं, जैसे ideaForge का ₹137 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट और Bharat Forge के ₹300 करोड़ के ड्रोन सप्लाई डील। InsideFPV की यह उपलब्धि, भले ही छोटी हो, अपने खास क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
आगे की चुनौतियां: उत्पादन बढ़ाना और प्रतिस्पर्धा
इस तरक्की के बावजूद, InsideFPV और अन्य डिफेंस टेक कंपनियों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। छोटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल सेना की बड़ी मांगों को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है, जिसे InsideFPV अपनी नई फैसिलिटी से हल करने की कोशिश कर रही है। डिफेंस मार्केट में काफी प्रतिस्पर्धा है, जिसमें ideaForge और Garuda Aerospace जैसी स्थापित कंपनियां और कई स्टार्टअप्स MoD से कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की होड़ में हैं। InsideFPV का खास कामिकाजी ड्रोन पर फोकस एक बड़ी मजबूती है, लेकिन टेक्नोलॉजी में आगे बने रहने के लिए लगातार रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) की जरूरत होगी, खासकर ड्रोन स्वार्मिंग (drone swarming) और एडवांस्ड GPS-डेनाइड नेविगेशन जैसी तकनीकों में। एक प्राइवेट कंपनी होने के नाते, InsideFPV की वित्तीय स्थिति सार्वजनिक कंपनियों की तरह उतनी पारदर्शी नहीं है, और इसका कारोबार काफी हद तक सरकारी खरीद चक्रों पर निर्भर करता है, जो तेज रास्तों के बावजूद धीमे हो सकते हैं।
InsideFPV के अगले कदम: विकास और नई तकनीक
InsideFPV के अगले कदम इस कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल करके बड़े ऑर्डर हासिल करना और अपने उत्पादों के विकास को आगे बढ़ाना है। इसमें इंटरसेप्टर ड्रोन (interceptor drones) और ड्रोन स्वार्मिंग टेक्नोलॉजी पर रिसर्च भी शामिल है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बनाना चाहती है। कुल मिलाकर, भारत का रक्षा क्षेत्र लगातार बढ़त पर है, जिसमें 'आत्मनिर्भरता' और तकनीकी प्रगति के जोर के कारण प्राइवेट कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है। जैसे-जैसे रक्षा मंत्रालय तेज खरीद के तरीके और घरेलू समाधानों की तलाश जारी रखेगा, InsideFPV जैसी कंपनियां तब तरक्की कर सकती हैं जब वे लगातार विकास और इनोवेशन दिखाएं।