प्राइवेट इक्विटी फर्म IndusBridge Ventures ने भारत के डिफेंस और एयरोस्पेस स्टार्टअप्स में निवेश के लिए **₹2,000 करोड़** का फंड जुटा लिया है। कंपनी ने अपने शुरुआती लक्ष्य को दोगुना कर दिया है, जो घरेलू मिलिट्री टेक्नोलॉजी में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।
फंड का दोगुना होना दिखा रहा है भरोसा
IndusBridge Ventures ने अपने डिफेंस-केंद्रित फंड के लिए ₹2,000 करोड़ सफलतापूर्वक जुटा लिए हैं। सह-संस्थापक रवि कपूर और राहुल देवजानी के नेतृत्व में इस फंड ने ₹1,000 करोड़ के अपने मूल लक्ष्य को पीछे छोड़ दिया है। इस बड़ी राशि में फैमिली ऑफिस, बैंकिंग संस्थानों और हाई-नेट-वर्थ निवेशकों का अहम योगदान रहा है।
सोवेरियन टेक्नोलॉजी (Sovereign Technology) पर फोकस
भारत अब डिफेंस सेक्टर में विदेशी निर्भरता को कम करने पर जोर दे रहा है। फंड की रणनीति ऐसे स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने की है जो 'डुअल-यूज़' (नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में उपयोग) वाली टेक्नोलॉजी बना सकें। राहुल देवजानी का मानना है कि विदेशी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर निर्भरता सुरक्षा के लिए जोखिम है, इसलिए स्वदेशी टेक्नोलॉजी स्टैक बनाना अब प्राथमिकता है।
क्या हैं निवेश के जोखिम?
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करने वाले निवेशकों को यह समझना होगा कि यह एक हाई-बैरियर सेक्टर है। अन्य कंज्यूमर-केंद्रित व्यवसायों के विपरीत, इसमें प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं। इसके अलावा, रेगुलेटरी नियम, भू-राजनीतिक बदलाव (geopolitical shifts) और सरकारी खरीद प्रक्रियाएं (procurement processes) इस पूरे खेल को जटिल बनाती हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फंड किस गति से स्टार्टअप्स को पैसा देता है और कंपनियां सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने में कितनी सक्षम साबित होती हैं।
