भारत अब डिफेंस के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम कर रहा है। 'Atmanirbhar Bharat' मुहिम के दम पर डिफेंस कैपिटल एक्सपेंडिचर **₹2.9 लाख करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, लॉन्ग टर्म ग्रोथ के साथ ही निवेशकों को ओवरवैल्युएशन और प्रोजेक्ट देरी जैसे जोखिमों पर नजर रखनी होगी।
स्ट्रक्चरल बदलाव की ओर भारत
भारतीय डिफेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव दिख रहा है, जहाँ अब विदेशी हथियारों के बजाय 'मेड इन इंडिया' पर जोर दिया जा रहा है। इसका सीधा असर बजट आवंटन पर दिख रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, FY26-27 के लिए डिफेंस कैपिटल आउटले ₹2.19 लाख करोड़ को पार कर चुका है, जो इस सेक्टर की तेज रफ्तार का गवाह है।
सरकारी योजनाओं का असर
'Atmanirbhar Bharat' पहल और 'Defence Acquisition Procedure' जैसी नीतियों ने घरेलू कंपनियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। अब फाइटर एयरक्राफ्ट से लेकर सबमरीन बनाने तक के बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स भारतीय कंपनियों को मिल रहे हैं, जिससे उनकी भविष्य की कमाई (Revenue Pipeline) काफी सुरक्षित नजर आती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Investment Risks)
ग्रोथ अच्छी है, लेकिन एक्सपर्ट्स की चिंताएं भी जायज हैं:
- ओवरवैल्युएशन: क्या मौजूदा शेयर भाव कंपनियों की असल कमाई के साथ कदम मिला पा रहे हैं, या उम्मीदें जरूरत से ज्यादा बढ़ गई हैं?
- ऑपरेशनल चुनौती: स्वदेशी तकनीक विकसित करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। किसी भी प्रोजेक्ट में देरी या सप्लाई चेन की समस्या का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और कैश फ्लो पर पड़ सकता है।
- ग्लोबल मुकाबला: एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी जगह बनाने के लिए भारतीय कंपनियों को क्वालिटी और कॉस्ट के मामले में ग्लोबल दिग्गजों को टक्कर देनी होगी।
अंत में, निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां अपने ऑर्डर बुक को कितनी तेजी से असल रेवेन्यू में बदल पा रही हैं। मार्जिन प्रोफाइल और समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी ही इस सेक्टर के अगले दौर की ग्रोथ तय करेंगे।
