भारत का डिफेंस प्रोडक्शन फाइनेंशियल ईयर में **₹1.8 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि एक्सपोर्ट **₹38,424 करोड़** रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक 'प्रोएक्टिव' नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी का ऐलान किया है, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूती मिलेगी।
नई पॉलिसी और विजन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की नेशनल सिक्योरिटी डॉक्ट्रिन में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। सरकार की नई 10-वर्षीय 'RAKSHA' रोडमैप का मुख्य मकसद सेना की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी को बढ़ाना है। यह बदलाव निवेशकों के लिए एक बड़ा मैसेज है कि सरकार डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) और खर्च को लेकर कितनी गंभीर है।
आंकड़ों की जुबानी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.8 लाख करोड़ रहा। इसमें डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) की हिस्सेदारी ₹1.29 लाख करोड़ की रही। बड़ी बात यह है कि अब भारतीय डिफेंस इक्विपमेंट 100 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए रेवेन्यू के नए रास्ते खुल गए हैं।
बजट और कंपनियों पर असर
केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.85 ट्रिलियन का भारी-भरकम बजट एलोकेट किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 15% ज्यादा है। इसका सीधा फायदा Hindustan Aeronautics, Bharat Electronics, और Mazagon Dock जैसी सरकारी कंपनियों के साथ-साथ L&T और Tata Advanced Systems जैसे प्राइवेट प्लेयर्स को मिलेगा।
निवेशकों के लिए सावधानी
मार्केट में डिफेंस स्टॉक्स पहले ही शानदार रैली दिखा चुके हैं, जिससे वैल्यूएशन थोड़े महंगे दिख रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब निवेशकों को सिर्फ ऑर्डर बुक के साइज को नहीं, बल्कि उसके एग्जीक्यूशन की क्वालिटी को देखना चाहिए। कच्चे माल (Commodity) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई चेन की जटिलताएं मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। आगे चलकर, कंपनियां कितनी तेजी से प्रोजेक्ट्स को रेवेन्यू में बदलती हैं, यह स्टॉक के प्रदर्शन के लिए सबसे अहम होगा।
