भारत का AI डिफेंस प्लान: विदेशी चिप्स पर भारी निर्भरता, आत्मनिर्भरता पर मंडराया खतरा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का AI डिफेंस प्लान: विदेशी चिप्स पर भारी निर्भरता, आत्मनिर्भरता पर मंडराया खतरा
Overview

भारत दुनिया भर में चल रहे संघर्षों और रणनीतिक स्वतंत्रता के लक्ष्य से प्रेरित होकर, अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए होमग्रोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास को गति दे रहा है। हालाँकि, देश भारी मात्रा में विदेशी हार्डवेयर, विशेष रूप से ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) पर निर्भर है। यह निर्भरता वैश्विक AI रेस और जटिल सप्लाई चेन के बीच एक बड़ी कमजोरी पैदा कर रही है, जो सच्ची तकनीकी आत्मनिर्भरता के रास्ते में रुकावट बन रही है।

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'मेक इन इंडिया' AI डिफेंस की राह में विदेशी हार्डवेयर का रोड़ा

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को स्वदेशी बनाने पर ज़ोर दे रहा है। सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भरता हासिल करना है, और इसी दिशा में रक्षा मंत्रालय भारतीय कंपनियों जैसे SarvamAI और BharatGen के साथ मिलकर काम कर रहा है। ये फर्में खुद के AI मॉडल विकसित कर रही हैं, जिनका मकसद भारतीय रक्षा प्रणालियों में AI को एकीकृत करना है। लक्ष्य एक ऐसा घरेलू AI इकोसिस्टम तैयार करना है जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हो, ठीक उसी तरह जैसे Palantir जैसी कंपनियां अपने देशों के लिए करती हैं, लेकिन पूरी तरह से भारतीय नियंत्रण में। AI को युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने की प्रक्रिया और संचालन की गति को बदलने वाला एक अहम हथियार माना जा रहा है।

हार्डवेयर की कमी: चिप्स के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता

AI सॉफ्टवेयर और मॉडल डेवलपमेंट में प्रगति के बावजूद, भारत की रक्षा AI की महत्वाकांक्षाएं विदेशी हार्डवेयर, खासकर ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) पर अपनी निर्भरता के कारण गंभीर रूप से बाधित हो रही हैं। इन GPUs की ज़रूरत एडवांस्ड AI मॉडलों को ट्रेनिंग देने और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए कंप्यूटिंग पावर का आधार बनाने हेतु पड़ती है। जहाँ भारतीय कंपनियाँ AI समाधान तैयार कर रही हैं, वहीं अंतर्निहित हार्डवेयर काफी हद तक आयातित है। यह स्थिति देश को भू-राजनीतिक जोखिमों, जैसे संभावित निर्यात नियंत्रण और सप्लाई चेन में बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है, खासकर एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वैश्विक माहौल में। चीन की 'इंटेलिजेंटाइज्ड वॉरफेयर' पर बढ़ते फोकस को देखते हुए, भारत के लिए अपनी तकनीकी बढ़त सुरक्षित करना और भी ज़रूरी हो जाता है।

सरकारी पहल: सब्सिडी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान

भारतीय सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए IndiaAI मिशन जैसी पहलों पर काम कर रही है, जिसमें घरेलू AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और कंप्यूटिंग पावर को अधिक सुलभ बनाने के लिए महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है। इस मिशन के तहत स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए सब्सिडी वाले दामों पर दसियों हज़ार GPUs उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही, Semiconductor Mission का लक्ष्य घरेलू चिप निर्माण क्षमताएं स्थापित करना है, जिसके तहत फैब्रिकेशन और असेंबली प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। SarvamAI सरकारी समर्थन से डिफेंस AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम कर रहा है, जबकि BharatGen व्यापक पहुंच के लिए डिज़ाइन किए गए AI मॉडल में योगदान दे रहा है। हालाँकि, एडवांस्ड AI सॉफ्टवेयर और हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग हार्डवेयर के घरेलू उत्पादन के बीच की खाई को पाटना एक बड़ी दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है, जो प्रमुख देशों की तुलना में पिछड़ने का कारण बन सकती है।

विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता के जोखिम

पूर्ण रक्षा AI आत्मनिर्भरता की ओर भारत का रास्ता महत्वपूर्ण जोखिमों से भरा है। विदेशी GPUs पर इसकी महत्वपूर्ण निर्भरता का मतलब है कि महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताएं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित हो सकती हैं। वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन अत्यधिक केंद्रित है और हाल की वैश्विक घटनाओं तथा अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों की तरह बाधाओं के प्रति संवेदनशील है। हालाँकि घरेलू सेमीकंडक्टर पहलें आगे बढ़ रही हैं, लेकिन अत्याधुनिक फैब्रिकेशन प्लांट और विशेष AI हार्डवेयर विकसित करने के लिए अत्यधिक पूंजी, समय और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो संभावित रूप से एक स्थायी अंतर छोड़ सकती है। चीन का AI डेवलपमेंट के लिए एकीकृत सैन्य-नागरिक संलयन मॉडल एक कठिन प्रतिस्पर्धी चुनौती पेश करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.