AMCA फाइटर जेट का बड़ा दांव: अब प्राइवेट सेक्टर संभालेगा कमान, HAL बाहर

AEROSPACE-DEFENSE
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AMCA फाइटर जेट का बड़ा दांव: अब प्राइवेट सेक्टर संभालेगा कमान, HAL बाहर
Overview

भारत ने अपने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट पार्टनर चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हैरानी की बात यह है कि इस बार सरकारी कंपनी HAL को प्रोटोटाइप (Prototype) फेज से बाहर रखा गया है। यह कदम स्वदेशी डिफेंस खरीद में एक बड़ा बदलाव है, जिसका मकसद प्राइवेट सेक्टर की फुर्ती और सप्लाई चेन की डिसिप्लिन का इस्तेमाल करके **30 महीनों** में पहली उड़ान भरना है।

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सरकारी कंपनियों से दूरी, प्राइवेट सेक्टर को तरजीह

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए प्राइवेट कंपनियों से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करना इस बात का साफ संकेत है कि सरकार अब हाई-इन्नोवेशन वाले प्रोजेक्ट्स के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगी। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने टेंडर के ऐसे मापदंड तय किए हैं जो कंपनियों की ऑपरेशनल क्षमता और मौजूदा ऑर्डर बुक के दबाव का आकलन करेंगे। इसका सीधा मतलब है कि HAL को इस बार दरकिनार किया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) प्रोग्राम की तरह प्रोजेक्ट में सालों की देरी से बचा जा सके। हालांकि, HAL पूरी तरह बाहर नहीं है, क्योंकि एयरक्राफ्ट के डिजाइन में 20-25% हिस्सा अभी भी उनका रहेगा। लेकिन अब प्राइवेट कंपनियां तेजी से प्रोटोटाइप बनाने का जोखिम उठाएंगी।

रेस में कौन-कौन?

प्राइवेट सेक्टर से तीन मुख्य ग्रुप इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं:

  • Tata Advanced Systems Ltd.: कंपनी ने हाल ही में C-295 एयरक्राफ्ट असेंबली लाइन शुरू की है और जटिल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग को लोकलाइज करने की अपनी क्षमता साबित की है।
  • Larsen & Toubro (L&T): यह कंपनी ₹4.35 लाख करोड़ के रिकॉर्ड तोड़ ऑर्डर इनफ्लो (FY26) और मजबूत बैलेंस शीट के साथ सिस्टम इंटीग्रेशन पावरहाउस के तौर पर उतर रही है।
  • Bharat Forge: कंपनी ने हाल ही में आर्टिलरी सिस्टम और कार्बाइन के लिए बड़े घरेलू डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स जीते हैं और अब ऑटोमोटिव सेगमेंट पर निर्भरता कम करने के लिए एयरोस्पेस में भी विस्तार कर रही है।

चुनौतियों पर एक नजर

हालांकि इंडस्ट्री इस कदम का जश्न मना रही है, लेकिन 30 महीनों में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की पहली उड़ान एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। प्रोग्राम का GE F414 इंजन पर निर्भर रहना एक बड़ी कमजोरी है, खासकर जब इस इंजन की सप्लाई चेन में हाल ही में दिक्कतें आई हैं। इसके अलावा, प्राइवेट कंपनियों को स्टील्थ (Stealth) तकनीक के लिए खास रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल (Radar-Absorbing Materials) और कॉम्प्लेक्स सेंसर फ्यूजन आर्किटेक्चर (Sensor Fusion Architecture) जैसी नई चीजों को सीखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जिन पर पारंपरिक रूप से DRDO और HAL का दबदबा रहा है। ये कंपनियां जमीनी स्तर से एक एयरोस्पेस इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रही हैं, साथ ही भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का बोझ भी उठा रही हैं।

भविष्य की रणनीति

सरकार का मकसद सिर्फ एक स्टील्थ जेट बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार करना है जो किसी एक कंपनी पर निर्भर न रहे। 2035 तक सात स्क्वाड्रन तैनात करने की योजना है, और सफल बोली लगाने वाले को एक समर्पित, भारत-नियंत्रित कंपनी स्थापित करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) और प्रोडक्शन कंट्रोल (Production Control) देश में ही रहे। अगले पांच महीनों में चयन प्रक्रिया पूरी होने के साथ, बाजार यह देखेगा कि क्या यह पब्लिक-प्राइवेट मॉडल भारत की सामरिक महत्वाकांक्षाओं और मैन्युफैक्चरिंग की ऐतिहासिक बाधाओं के बीच की खाई को पाट पाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.