Ministry of Defence ने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए **15 साल** का एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। इसका मकसद **2035** तक **80%** आत्मनिर्भरता हासिल करना है, जिससे प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को लंबे समय के लिए ऑर्डर मिलने का भरोसा मिलेगा।
डिफेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव
रक्षा मंत्रालय 2025-2040 तक के लिए एक बड़े बदलाव की तैयारी कर चुका है। यह पहल ₹35 लाख करोड़ के उस आधुनिकीकरण प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत विदेशी आयात पर निर्भरता कम करके घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्राइवेट सेक्टर के लिए क्या बदला?
अब तक प्राइवेट कंपनियों के लिए सैन्य खरीद (Military Procurement) में सबसे बड़ी अनिश्चितता रहती थी। सरकार ने अब इसे बदलने का फैसला किया है। इसके लिए एक 3-स्तरीय क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम और सेंट्रलाइज्ड वेंडर रजिस्ट्रेशन शुरू किया जा रहा है, ताकि छोटी कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में आना आसान हो जाए।
सितंबर 2025 में सरकार ने अनमैन्ड एयरक्राफ्ट पर GST घटाकर 5% कर दिया था, जो इस सेक्टर को मिली एक बड़ी राहत है। Paras Defence और Astra Microwave जैसी कंपनियां इस बदलाव से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती हैं।
जोखिम और चुनौतियां
रोडमैप महत्वाकांक्षी है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अभी भी भारत एडवांस्ड सेंसर और एयरो-इंजन जैसे अहम हिस्सों के लिए आयात पर निर्भर है। साथ ही, MSMEs के लिए प्रोटोटाइप से मास प्रोडक्शन तक का सफर तय करने में वित्तीय जोखिम काफी बड़ा है।
निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि सरकार कब तक इन कागजी वादों को पक्के मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट्स में बदल पाती है।
