रक्षा क्षेत्र में बूम: पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय डिफेंस स्टॉक्स में आई तूफानी तेजी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
रक्षा क्षेत्र में बूम: पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय डिफेंस स्टॉक्स में आई तूफानी तेजी

इस साल निफ्टी डिफेंस इंडेक्स में करीब **20%** की तेजी आई है, जिसकी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता जिओ-पॉलिटिकल तनाव है। सरकार ने **₹16.6 ट्रिलियन** के प्रोक्योरमेंट अप्रूवल दिए हैं, लेकिन अब निवेशकों का फोकस ऑर्डर बुक के बजाय कंपनियों की डिलीवरी क्षमता पर है।

क्यों उछले डिफेंस स्टॉक्स?

साल 2026 में भारतीय डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखी गई है। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स ने निफ्टी 50 को पीछे छोड़ दिया है। जहां निफ्टी 50 में साल की शुरुआत से अब तक 8% की गिरावट आई है, वहीं डिफेंस इंडेक्स 20% से अधिक चढ़ चुका है। इसके पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता जिओ-पॉलिटिकल तनाव है। इस तनाव के चलते सरकार 'मेक इन इंडिया' और डिफेंस में आत्मनिर्भरता पर और ज्यादा जोर दे रही है, जिससे घरेलू सैन्य हार्डवेयर की मांग बढ़ गई है।

वैल्यूएशन में बड़ा बदलाव

मार्केट डेटा के अनुसार, निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो साल की शुरुआत में 51.8x था, जो अब बढ़कर 56.5x हो गया है। वहीं, बेंचमार्क निफ्टी 50 का वैल्यूएशन घटकर 20.8x रह गया है। इससे साफ है कि निवेशक डिफेंस कंपनियों से जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं और इस सेक्टर को बाकी मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर देख रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी सिर्फ सेंटीमेंट पर आधारित है या फिर कंपनियों की कमाई (Earnings) में भी वैसी ही बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

ऑर्डर बुक और डिलीवरी की चुनौती

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने फिस्कल ईयर 2024 से 2026 के बीच ₹16.6 ट्रिलियन के प्रोक्योरमेंट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें 'Buy Indian-IDDM' और 'Buy & Make (Indian)' कैटेगरी के प्रोजेक्ट्स प्रमुख हैं, जिनमें भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हिस्सा शामिल है। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) के लिए ऑर्डर-बुक-टू-रेवेन्यू रेशियो 2x से 10x तक मजबूत बना हुआ है, यानी उनके पास काम के कई सालों का ऑर्डर है।

हालांकि, प्राइवेट डिफेंस कंपनियों के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। इन कंपनियों का ऑर्डर बुक आमतौर पर उनके सालाना रेवेन्यू का दोगुना से भी कम होता है। इसका मतलब है कि प्राइवेट कंपनियों को अपने मौजूदा मार्केट वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए लगातार नए कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने होंगे। अब सभी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा फोकस 'एग्जीक्यूशन रिस्क' है। यानी, सिर्फ ऑर्डर मिलना काफी नहीं है, निवेशकों को यह देखना है कि कंपनियां समय पर और बिना लागत बढ़े इन ऑर्डर्स को पूरा कर पाती हैं या नहीं।

सेक्टर में बढ़ती असमानता

हाल के मार्केट मूवमेंट्स से इस सेक्टर में एक बड़ी खाई नजर आ रही है। जहां MTAR Technologies, Astra Microwave Products और Paras Defence and Space Technologies जैसी कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है, वहीं Bharat Dynamics, Cochin Shipyard, Mazagon Dock और BEML जैसे बड़े नामों में गिरावट देखने को मिली है। यह दिखाता है कि मार्केट अब कंपनियों को उनके स्पेसिफिक प्रोडक्ट मिक्स, एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स से आगे मार्जिन बढ़ाने की क्षमता के आधार पर आंक रहा है। अब निवेशकों के लिए अगली बड़ी चीज यह देखना होगा कि क्या कंपनियों की कमाई की रिपोर्ट (Quarterly Earnings Reports) में बड़े ऑर्डर पाइपलाइन से टॉप-लाइन ग्रोथ, बॉटम-लाइन प्रॉफिटेबिलिटी में बदल पा रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.