Indian Army ने कॉम्बैट ड्रोन के लिए नया स्वदेशी एम्युनिशन फ्रेमवर्क लॉन्च किया है, जिससे डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया गया है। Solar Industries जैसी घरेलू कंपनियां अब युद्धक हथियारों के स्थानीय उत्पादन में तेजी ला रही हैं, हालांकि निवेशकों को हाई वैल्युएशन और रेगुलेटरी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।
भारतीय सेना ने अब केवल ड्रोन एयरफ्रेम खरीदने के बजाय, पूरे कॉम्बैट इकोसिस्टम को नियंत्रित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य ड्रोन पर लगाए जाने वाले हथियारों और वॉरहेड्स का स्थानीय स्तर पर निर्माण करना है, ताकि विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म हो सके। इन पेलोड्स को एंटी-पर्सनेल, एंटी-टैंक और एंटी-बंकर जैसे श्रेणियों में बांटा गया है।
डिफेंस सेक्टर में घरेलू कंपनियों का दबदबा
'आत्मनिर्भरता' की नीति के तहत घरेलू कंपनियों को बड़ा मौका मिला है। Solar Industries India की सहायक कंपनी Solar Defence and Aerospace ने अक्टूबर 2026 में सेना को 450 Nagastra-1R लोइटरिंग म्यूनिशन सौंपकर अपनी क्षमता साबित की है। Premier Explosives जैसी कंपनियां भी इस दौड़ में शामिल हैं।
फाइनेंशियल और वैल्युएशन का गणित
Solar Industries ने Q1 FY27 में शानदार प्रदर्शन करते हुए नेट प्रॉफिट में 92.6% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। डिफेंस सेगमेंट में तो कंपनी ने 123% की ग्रोथ दिखाई है। हालांकि, डिफेंस स्टॉक्स का P/E रेशियो काफी ऊंचा है, जो उम्मीदों को दर्शाता है। इसलिए, किसी भी सरकारी नीति में बदलाव या डिलीवरी में देरी स्टॉक पर असर डाल सकती है।
जोखिम और सतर्क रहने की जरूरत
सेक्टर की ग्रोथ अच्छी है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। AI-आधारित सिस्टम बनाना तकनीकी रूप से कठिन है। साथ ही, Munitions India Limited और SMPP से जुड़ी हालिया जांच रेगुलेटरी रिस्क की याद दिलाती है। निवेशकों को ऑर्डर मिलने के अलावा कंपनियों के मार्जिन और सरकारी पॉलिसी की रफ्तार पर भी नजर रखनी चाहिए।
