Indian Army Plans 540 Kamikaze Drones: डिफेंस सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, जानें निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Army Plans 540 Kamikaze Drones: डिफेंस सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, जानें निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत

Indian Army अब अपनी स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाने के लिए **540** हाई-स्पीड जेट-पावर्ड 'कामिकेज़ ड्रोन' (Kamikaze Drones) खरीदने की तैयारी कर रही है। यह कदम आधुनिक युद्धनीति की ओर एक बड़ा बदलाव है, लेकिन डिफेंस सेक्टर के सामने सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट जैसी चुनौतियां भी बरकरार हैं।

भारतीय सेना का आधुनिकीकरण अब तेजी पकड़ रहा है। सेना 540 हाई-स्पीड कामिकेज़ ड्रोन्स के परीक्षण की प्रक्रिया में है। यह बदलाव 'पैसिव सर्विलांस' से हटकर 'एक्टिव काइनेटिक' क्षमताओं की ओर एक बड़ा कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य 'प्रिसिजन मास' (Precision Mass) हासिल करना है, जिससे महंगे क्रूज मिसाइलों की जगह कम लागत वाले ड्रोन से सटीक हमले किए जा सकें।

सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग चुनौतियां

सरकार ने अगले 5 वर्षों में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक के डिफेंस खर्च का लक्ष्य रखा है, लेकिन घरेलू कंपनियों के लिए राह आसान नहीं है। फ्लाइट कंट्रोलर्स, ब्रशलेस डीसी मोटर्स और सेमीकंडक्टर्स जैसे अहम पुर्जों के लिए भारत अभी भी विदेशी आयात पर काफी निर्भर है। हालांकि चीन निर्मित उपकरणों पर प्रतिबंध से सुरक्षा बढ़ी है, लेकिन अमेरिका या यूरोप से आयात पूरी तरह से आत्मनिर्भरता का विकल्प नहीं है। चिप फैब्रिकेशन की कमी इस सेक्टर के लिए लंबे समय तक एक कमजोरी बनी रह सकती है।

प्रोक्योरमेंट की पेचीदगियां

डिफेंस सेक्टर में ऑर्डर का बंटवारा थल सेना, वायु सेना, नौसेना और अर्धसैनिक बलों के बीच टुकड़ों में होता है, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन (Mass Production) के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। IDEX जैसी योजनाओं ने नई तकनीक को तो बढ़ावा दिया है, लेकिन प्रोटोटाइप को इंडस्ट्रियल-ग्रेड प्रोडक्शन में बदलना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

स्ट्रैटेजिक इंटीग्रेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ हार्डवेयर काफी नहीं है। ड्रोन को स्पेस-बेस्ड सेंसर और लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स के साथ एक नेटवर्क में जोड़ना जरूरी है। बिना एल्गोरिदम-आधारित कमान के ये ड्रोन युद्ध क्षेत्र में ऑपरेशन्स को उलझा सकते हैं। निवेशकों के लिए कंपनी चुनते समय यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन सी कंपनियां आयात पर निर्भरता कम कर रही हैं और सरकारी ऑर्डर्स हासिल करने में कितनी सक्षम हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.