Indian Army का बड़ा फैसला: बॉर्डर पर बनेंगे 19 'अंडरग्राउंड फोर्ट्रेस', डिफेंस सेक्टर में आएगी नई जान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Army का बड़ा फैसला: बॉर्डर पर बनेंगे 19 'अंडरग्राउंड फोर्ट्रेस', डिफेंस सेक्टर में आएगी नई जान

सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए Indian Army बॉर्डर पर **19** अंडरग्राउंड फैसेलिटीज का निर्माण कर रही है। Northern Command और सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील इलाकों में बनने वाले ये बंकर्स डिफेंस कंपनियों और MSMEs के लिए बड़े मौके लेकर आए हैं।

भारतीय सेना अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए सरहद पर सुरक्षा का एक नया कवच तैयार कर रही है। इसके तहत 19 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए जमीन के अंदर बंकर्स, कमांड सेंटर्स और गोला-बारूद डिपो बनाए जा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य फोकस Northern Command और रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर है, ताकि दुश्मन की मिसाइलों और एयर स्ट्राइक के दौरान भी सेना के महत्वपूर्ण एसेट्स सुरक्षित रहें।

डिफेंस सेक्टर के लिए 'गेम चेंजर'

यह प्रोजेक्ट सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ा मौका है। सरकार इसमें MSMEs और बड़ी डिफेंस कंपनियों को साथ लेकर चल रही है। 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के तहत, प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर्स और स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग के उपयोग से स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। निवेशकों के लिए अच्छी बात यह है कि यह अवसर किसी एक कंपनी तक सीमित न रहकर इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कई कंपनियों में फैला हुआ है।

चुनौतियां और जोखिम (The Risk Factors)

इतने बड़े स्तर के प्रोजेक्ट्स में जोखिम भी कम नहीं हैं। हिमालय जैसे दुर्गम और ऊंचे इलाकों में अंडरग्राउंड स्ट्रक्चर्स बनाना एक इंजीनियरिंग चुनौती है। यहाँ सीपेज, नमी और चट्टानों की अनस्टेबल बनावट जैसे तकनीकी पेंच कंपनियों के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स का भविष्य सरकारी बजट और पॉलिसी साइकिल पर टिका है, इसलिए समय पर साइट क्लियरेंस और बजट का आवंटन इस पूरे मिशन की सफलता के लिए 'की-मॉनिटरेबल' फैक्टर रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.