Indian Army का बड़ा कदम: AASHVAST लैब के जरिए अब ड्रोन्स की होगी डिजिटल सर्जरी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Army का बड़ा कदम: AASHVAST लैब के जरिए अब ड्रोन्स की होगी डिजिटल सर्जरी

भारतीय सेना ने नई दिल्ली में 'AASHVAST' लैब लॉन्च की है, जो मिलिट्री ड्रोन्स के हार्डवेयर और फर्मवेयर में छिपे साइबर खतरों और विदेशी जासूसी टूल्स का पता लगाएगी।

डिजिटल युद्ध के लिए तैयार भारतीय सेना

भारतीय सेना ने अपने अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAVs) की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक विशेष टेस्टिंग लैब 'AASHVAST' की शुरुआत की है। नई दिल्ली में स्थित यह लैब साइबर जासूसी के बढ़ते खतरों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण डिफेंस लेयर के रूप में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रोन्स के हार्डवेयर और फर्मवेयर में छिपी उन खामियों को पकड़ना है, जो सैन्य ऑपरेशन्स को खतरे में डाल सकती हैं।

कैसे काम करेगी यह लैब?

'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग' द्वारा संचालित यह लैब केवल फिजिकल इंस्पेक्शन तक सीमित नहीं है। यहाँ एक्सपर्ट्स ड्रोन्स के फ्लाइट कंट्रोलर्स और कैमरा पेलोड्स का बारीकी से डिजिटल विश्लेषण करेंगे। इस प्रक्रिया में छिपे हुए पासवर्ड्स, एन्क्रिप्शन कीज़ और रिमोट-एक्सेस टूल्स की पहचान की जाएगी। सुरक्षा के लिए यह पूरी लैब 'एयर-गैप्ड' (ऑफ़लाइन) एनवायरनमेंट में काम करेगी, जिससे डेटा लीक का कोई खतरा नहीं रहेगा। साथ ही, यह लैब ड्रोन्स को GPS स्पूफिंग और जैमिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर हमलों के खिलाफ भी टेस्ट करेगी।

विदेशी निर्भरता पर लगाम

यह पहल सैन्य उपकरणों में विदेशी घटकों, विशेष रूप से चीन में बने पार्ट्स की बढ़ती चिंता को दूर करने के लिए है। डिफेंस अधिकारी लगातार घरेलू सप्लाई चेन से संदिग्ध पुर्जों को हटाने पर जोर दे रहे हैं। AASHVAST लैब न केवल अनधिकृत फर्मवेयर अपडेट्स को ब्लॉक करेगी, बल्कि 'वायरलेस एंड सिक्योरिटी एंटी-ड्रोन लैब' के साथ मिलकर पूरी तरह से 'स्वदेशी डिफेंस इकोसिस्टम' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस तकनीक के जरिए सेना यह सुनिश्चित करेगी कि सीमावर्ती इलाकों में तैनात हर ड्रोन पूरी तरह सुरक्षित है।

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