Indian Army Drone Deal: TASL और NIBE को ₹1,577 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, स्वदेशी हथियार प्रणाली को बढ़ावा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Army Drone Deal: TASL और NIBE को ₹1,577 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, स्वदेशी हथियार प्रणाली को बढ़ावा

भारतीय सेना ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) और NIBE लिमिटेड के साथ ₹1,577 करोड़ का एक बड़ा सौदा किया है। इस सौदे के तहत 840 लोइटरिंग म्यूनिशन (कमिकाज़ी ड्रोन) खरीदे जाएंगे। यह ऑर्डर 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत स्वदेशी तकनीक पर केंद्रित ₹20,000 करोड़ के आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद भारत की सीमाओं पर निगरानी और स्ट्राइक क्षमताओं को मजबूत करना है।

सेना को मिलेंगी नई 'कमिकाज़ी' ड्रोन

भारतीय सेना अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और NIBE लिमिटेड के साथ 840 लॉन्ग-रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन, जिन्हें 'कमिकाज़ी ड्रोन' भी कहा जाता है, की खरीद के लिए ₹1,577 करोड़ का पक्का ऑर्डर दिया है। यह सौदा सेना के लिए ₹20,000 करोड़ के बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सेना को नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली की ओर ले जाना है।

'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर

इस पहल में पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित प्रणालियों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' और 'बाय इंडियन' नीतियों के अनुरूप है। सरकारी अनुबंधों के लिए, रक्षा उपकरणों में आमतौर पर 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री होना आवश्यक है। इसका उद्देश्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और एक आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

सीमाओं की सुरक्षा और भविष्य की योजनाएं

₹20,000 करोड़ के इस व्यापक कार्यक्रम का उद्देश्य सैनिकों को विशेष रूप से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उन्नत निगरानी ग्रिड और सटीक-स्ट्राइक प्लेटफॉर्म से लैस करना है। हालिया सौदे के अलावा, भारतीय रक्षा क्षेत्र में कई अन्य घरेलू कंपनियां भी सक्रिय हैं जो ड्रोन और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में योगदान दे रही हैं, जिनमें ideaForge, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, ज़ेन टेक्नोलॉजीज और सोलर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां शामिल हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

निवेशकों के लिए मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि ये कंपनियां इन ऑर्डरों को कैसे पूरा करती हैं। हालांकि सरकार तेजी से डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट (FTP) मार्ग का उपयोग कर रही है, फिर भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री बनाए रखने की आवश्यकता का मतलब है कि कंपनियों को जटिल आपूर्ति श्रृंखलाओं का प्रबंधन करना होगा, जिसमें अक्सर उच्च-प्रदर्शन वाले एयरफ्रेम, उन्नत सॉफ्टवेयर और विशेष इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण घटकों को स्थानीय स्तर पर सोर्स करने में कठिनाई होती है।

क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। जैसे-जैसे अधिक निजी फर्में और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां इन रक्षा अनुबंधों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, कंपनियों को अपने मार्जिन बनाए रखने के लिए मजबूत परियोजना निष्पादन क्षमताओं और लागत दक्षता का प्रदर्शन करना होगा। इन परियोजनाओं की लाभप्रदता उत्पादन को बढ़ाने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगी, साथ ही कच्चे माल और विकास लागत को नियंत्रण में रखना भी आवश्यक होगा।

भविष्य को देखते हुए, निवेशक इन 840 ड्रोनों के डिलीवरी समय-सीमा पर नज़र रख सकते हैं और यह भी कि क्या सरकार अतिरिक्त निगरानी प्रणालियों के लिए और बड़े पैमाने पर निविदाएं जारी करती है। इन स्वदेशी प्लेटफार्मों को तैनात करने की गति और फील्ड ट्रायल में उनका प्रदर्शन, इसमें शामिल निर्माताओं के लिए भविष्य के ऑर्डर प्रवाह को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक होने की संभावना है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.