Indian Air Force जैसलमेर में **14 से 16 सितंबर** तक 'Dronathon-2026' का आयोजन करने जा रही है। इस इवेंट में घरेलू ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की क्षमता को परखा जाएगा, जो भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है।
भारतीय वायु सेना (IAF) पोखरण फायरिंग रेंज, जैसलमेर में 'Dronathon-2026' का आयोजन कर रही है। यह महज एक एग्जीबिशन नहीं, बल्कि एक फील्ड-टेस्टिंग प्लेटफॉर्म है। यहाँ स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स अपने अनमैन्ड एरियल सिस्टम और काउंटर-ड्रोन समाधानों को रियल-वर्ल्ड कंडीशंस में प्रदर्शित करेंगे, जिसमें स्वाम टेक्नोलॉजी (swarm technology) और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सुइट्स का परीक्षण शामिल है।
प्रोक्योरमेंट में रणनीतिक बदलाव
यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत डिफेंस प्रोक्योरमेंट में आ रहे बदलाव को दर्शाती है। सरकार अब केवल प्रोडक्ट डिस्प्ले पर निर्भर रहने के बजाय लाइव फील्ड स्ट्रेस टेस्ट पर ध्यान दे रही है, जिससे कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स को मिलिट्री स्टैंडर्ड के मुताबिक सुधारने में मदद मिल रही है। हाल ही में बेंगलुरु स्थित एयरबाउंड (Airbound) ने $37 मिलियन की फंडिंग जुटाई है, जो इस इकोसिस्टम में निवेशकों के भरोसे को दिखाती है। हालांकि, डीप-टेक स्टार्टअप्स में अभी भी रिसर्च की लागत और स्केलेबिलिटी जैसे रिस्क बने हुए हैं।
डिफेंस सेक्टर की चुनौतियाँ
निवेशकों को यह समझना होगा कि एक सफल फील्ड डेमोंस्ट्रेशन से सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलने तक का सफर काफी लंबा हो सकता है। डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसेस जटिल होती है, जिसमें बजट अप्रूवल और कड़ी क्वालिटी चेक से गुजरना पड़ता है। साथ ही, बढ़ते कंपटीशन के चलते अब कंपनियों को तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स और सप्लाई चेन की मजबूती साबित करनी होगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इवेंट के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि कौन सी टेक्नोलॉजी प्रोक्योरमेंट पाइपलाइन में जगह बनाती है। लंबी अवधि के नजरिए से, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वदेशी तकनीक को अपनाने से डिफेंस कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन और ऑर्डर बुक पर क्या असर पड़ता है।
