मई **2025** में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के डी-क्लासिफाइड रिकॉर्ड्स से पता चला है कि भारतीय वायु सेना (IAF) ने चीन की रसद को रोकने के लिए Skardu एयरबेस को टारगेट किया था। खराब मौसम के कारण इस प्लान को बदलना पड़ा और बाद में Bholari एयरबेस पर सफल स्ट्राइक की गई।
हाल ही में जारी किए गए सैन्य रिकॉर्ड्स से मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के पीछे की रणनीतिक योजना का पता चला है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित Skardu एयरबेस को निशाना बनाकर चीन को एक कड़ा संदेश देना था, क्योंकि यह बेस 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर' (CPEC) के लिए लॉजिस्टिक्स सपोर्ट का काम करता है।
मिशन में बदलाव और Bholari पर प्रहार
Skardu को टारगेट करने की मंजूरी मिलने के बावजूद, भारतीय वायु सेना को पहाड़ी इलाकों में बेहद खराब मौसम का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन को बीच में ही रोकना पड़ा। हालांकि, IAF ने तुरंत अपनी रणनीति बदली और कराची के Bholari एयरबेस पर सफलतापूर्वक हमला किया। इस हमले में दुश्मन के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा और वहां तैनात कर्मियों के हताहत होने की पुष्टि हुई।
डिफेंस सेक्टर पर असर और निवेश के मौके
यह खुलासा भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए नए संकेतों की ओर इशारा करता है। आधुनिक हवाई युद्ध में अब precision-guided munitions, लॉन्ग-रेंज रडार सिस्टम और सुरक्षित कम्युनिकेशन नेटवर्क की जरूरत बढ़ गई है। भारत के 'आत्मनिर्भर डिफेंस' विजन के तहत, Skardu जैसे लॉजिस्टिक्स हब को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखने वाले एडवांस एरोस्पेस और सर्विलांस टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ेगी।
इस रिपोर्ट में Kirana Hills का भी जिक्र है, जहां अधिकारियों के मुताबिक, हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशन के दौरान गलती से एक 'लोइटरिंग म्यूनिशन' गिरने की घटना हो सकती है। निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए, सरकार का डिफेंस बजट, आधुनिक हथियारों का तेजी से अडॉप्शन और स्वदेशी कंपनियों द्वारा खराब मौसम में भी सटीक मार करने वाले हार्डवेयर की डिलीवरी ही आने वाले समय में सेक्टर की ग्रोथ तय करेगी।
