रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस में हाई-लेवल बैठकें की हैं, जिसका मकसद डिफेंस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को रफ्तार देना है। इसमें GE F414-INS6 जेट इंजन का प्रोडक्शन और जापान के साथ मैरीटाइम स्टील्थ तकनीक पर जोर दिया गया है, जो घरेलू डिफेंस कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
GE इंजन डील से बढ़ेगी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
अमेरिकी पक्ष के साथ चर्चा में जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के F414-INS6 जेट इंजन का जॉइंट प्रोडक्शन मुख्य एजेंडा रहा है। यह प्रोजेक्ट Tejas Mk2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें 80% तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात कही गई है, जो अगर सफल होती है, तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के लिए लॉन्ग-टर्म मार्जिन में सुधार और आयात पर निर्भरता कम करने का बड़ा जरिया बन सकता है।
जापान के साथ मैरीटाइम टेक्नोलॉजी में मजबूती
नौसेना की शक्ति बढ़ाने के लिए भारत और जापान के बीच तालमेल गहरा हो रहा है। इसके तहत भारतीय युद्धपोतों पर UNICORN मास्ट को इंटीग्रेट किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और NEC कॉरपोरेशन मिलकर काम कर रहे हैं। इसका मुख्य फोकस जहाजों की रडार क्रॉस-सेक्शन को कम करना है, जो आधुनिक युद्ध के लिए जरूरी है। ऐसी साझेदारी से BEL को भविष्य में हाई-वैल्यू ऑर्डर मिलने की पूरी उम्मीद है।
निवेशक क्या रखें ध्यान?
ये तमाम पहल 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन का हिस्सा हैं, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि डिफेंस सेक्टर के ये प्रोजेक्ट्स लंबी अवधि के हैं। इसमें 80% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती है और इसके लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका अहम होगी। किसी भी प्रकार की प्रोजेक्ट देरी या जियो-पॉलिटिकल बदलाव से कंपनियों के फाइनेंशियल आउटलुक पर असर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों को इन समझौतों पर हस्ताक्षर और प्रोडक्शन टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए।
