India MRO Hub: टैक्स में भारी कटौती, ज़मीन नियमों में ढील! बनेगा एयरक्राफ्ट रिपेयर का ग्लोबल सेंटर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India MRO Hub: टैक्स में भारी कटौती, ज़मीन नियमों में ढील! बनेगा एयरक्राफ्ट रिपेयर का ग्लोबल सेंटर

भारत एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेवाओं के लिए एक ग्लोबल हब बनने की राह पर है। सरकार ने GST को घटाकर **5%** कर दिया है और कस्टम ड्यूटी में भी छूट दी है। इससे विदेशी एयरोस्पेस कंपनियों को भारत में निवेश करने का मौका मिलेगा।

Detailed Coverage

एयरक्राफ्ट रिपेयर का हब बनेगा भारत!

भारत सरकार देश को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेवाओं का ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलहाल, भारत के बढ़ते एयरलाइन बेड़े का बड़ा हिस्सा विदेशों में ठीक कराया जाता है, जिस पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। सरकारी नियमों और टैक्स में बड़े बदलावों के ज़रिए, भारत इस काम को देश में ही करके विदेशी मुद्रा बचाना चाहता है।

टैक्स और ड्यूटी में बड़ी राहत

इस रणनीति का एक बड़ा हिस्सा MRO सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए ऑपरेशंस की लागत कम करना है। अब इंपोर्टेड एयरक्राफ्ट पार्ट्स और इंजन पर इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) सिर्फ 5% कर दिया गया है। पहले यह 18% के स्लैब में था, जिससे भारत में रिपेयर शॉप्स दुबई या सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय सेंटर्स के मुकाबले ज्यादा किफायती हो गई हैं।

कस्टम ड्यूटी में भी राहत दी गई है। 31 मार्च 2028 तक एयरक्राफ्ट के ज़रूरी पार्ट्स, टेस्टिंग इक्विपमेंट और कंपोनेंट्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) को पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। साथ ही, विदेशी कंपनियों से काम लेने वाले भारतीय फर्मों को अब एक्सपोर्ट माना जाएगा, जिस पर जीरो-रेटेड GST लगेगा। इससे विदेशी एयरलाइंस को भारत में अपना मेंटेनेंस काम आउटसोर्स करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

ज़मीन और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा

सिविल एविएशन मंत्रालय ने इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों को दूर करने के लिए ज़मीन और ऑपरेशनल गाइडलाइंस में भी बदलाव किए हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अधीन आने वाले एयरपोर्ट्स पर ज़मीन आवंटन की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। ऑपरेटर्स अब 15 साल के एक्सटेंशन के साथ लीज एग्रीमेंट कर सकते हैं, जिससे उन्हें लंबी अवधि की स्थिरता मिलेगी। साथ ही, नए हैंगर बनाने वाली कंपनियों के लिए शुरुआती खर्च का बोझ कम करने हेतु, MRO गाइडलाइंस में किराए-मुक्त अवधि और मोरेटोरियम जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।

प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और सेक्टर पर असर

यह पॉलिसी बदलाव दुनिया की बड़ी एयरोस्पेस कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। Safran Aircraft Engine Services India (SAESI) ने हैदराबाद में ₹1,300 करोड़ के भारी निवेश से एक बड़ी फैसिलिटी खोली है। यह दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट इंजन MRO सेंटर्स में से एक है, जो भारत की टेक्निकल स्किल्स और लागत संरचना में बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

हालांकि, इन पॉलिसी बदलावों से सेक्टर के विकास की राह आसान हुई है, लेकिन असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय कंपनियां कितनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताएं बढ़ा पाती हैं। एविएशन इंडस्ट्री के लिए सबसे अहम माने जाने वाले टर्नअराउंड टाइम (काम पूरा करने में लगने वाला समय) को कम करने और जटिल सप्लाई चेन को मैनेज करने की भारतीय MRO प्रोवाइडर्स की काबिलियत ही भविष्य में ग्रोथ की चाबी होगी। निवेशक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स आने वाले सालों में नए हैंगरों की क्षमता उपयोग और बड़ी ग्लोबल एयरलाइंस द्वारा अपने रिपेयर कॉन्ट्रैक्ट्स को भारतीय सुविधाओं में ट्रांसफर करने की रफ़्तार पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.