नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने अगले दो वर्षों में स्वदेशी सिविल एयरक्राफ्ट लाने का ऐलान किया है। हालांकि, यह महत्वाकांक्षी योजना ऐसे समय आई है जब एविएशन सेक्टर रिकॉर्ड महंगे जेट फ्यूल और घटती यात्री मांग से जूझ रहा है।
दो साल में आत्मनिर्भर उड़ान
सरकार ने अगले 2 वर्षों में भारत का पहला स्वदेशी सिविल एयरक्राफ्ट लॉन्च करने का खाका तैयार कर लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोजेक्ट एक जॉइंट वेंचर मॉडल के जरिए पूरा किया जाएगा। भारत का लक्ष्य ग्लोबल एविएशन सप्लाई चेन में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना है, क्योंकि देश इस समय दुनिया के सबसे बड़े फ्लीट विस्तार की तैयारी कर रहा है।
बड़े ऑर्डर और विजन 2030
भारतीय एयरलाइंस ने पहले ही 1,600 से ज्यादा नए विमानों का ऑर्डर दे दिया है, जिसकी बाजार वैल्यू करीब $100 बिलियन है। सरकार का टारगेट है कि भारत में बनने वाले एयरोस्पेस कंपोनेंट्स की वैल्यू, जो अभी सालाना $4 बिलियन है, उसे 2030 तक $10 बिलियन तक ले जाया जाए। इसके अलावा, जेट इंजन की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर भी विचार चल रहा है, जो एक बड़ा टेक्निकल गोल है।
सेक्टर के सामने बड़ी चुनौतियां
मैन्युफैक्चरिंग के इन बड़े सपनों के बीच, एविएशन सेक्टर को फिलहाल भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें रिकॉर्ड ₹137 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। बढ़ती लागत को मैनेज करने के लिए IndiGo जैसी एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है।
यात्री मांग में कमी और वित्तीय दबाव
सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक घरेलू हवाई यात्रा में 6.34% की गिरावट आई है। खराब होती वित्तीय स्थिति को देखते हुए फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सरकार से तत्काल लिक्विडिटी सपोर्ट की मांग की है। इंडस्ट्री अब ECLGS 5.0 जैसी सरकारी क्रेडिट योजनाओं के तहत रुकी हुई फंड्स की रिलीज का इंतजार कर रही है, ताकि कैश फ्लो बना रहे।
