इंडियन एयर फोर्स (IAF) वित्त वर्ष 2027 तक **114 रफाल (Rafale)** फाइटर जेट्स के लिए **₹3.25 लाख करोड़** का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करने की तैयारी में है। यह डील न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी, बल्कि स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को भी नई उड़ान देगी।
इंडियन एयर फोर्स (IAF) अपनी हवाई ताकत को मजबूत करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। मार्च 2027 तक 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार, फ्रांस के साथ बातचीत अब अंतिम चरण में है और यह डील एक सरकारी फ्रेमवर्क के तहत पूरी की जाएगी।\n\n### भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ी खबर\n\nफिलहाल वायुसेना के पास लगभग 29 फाइटर स्क्वॉड्रन हैं, जबकि जरूरत 42.5 स्क्वॉड्रन की है। इस अंतर को भरने के लिए 114 रफाल जेट्स एक गेम चेंजर साबित होंगे। इस डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 'बाय एंड मेक' (Buy and Make) मॉडल पर आधारित है। इसका मतलब है कि जेट्स के निर्माण, असेंबली और हथियारों के इंटीग्रेशन में भारतीय कंपनियों की बड़ी भूमिका होगी।\n\nइन्वेस्टर्स के लिए यह लॉन्ग-टर्म में एक बेहतरीन अवसर हो सकता है। डिफेंस सप्लाई चेन में काम करने वाली इंजीनियरिंग फर्म्स, कंपोनेंट बनाने वाली छोटी कंपनियां और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लायर्स के लिए यह एक बड़ा बूस्ट है।\n\n### क्या हैं चुनौतियां और जोखिम?\n\nइतने बड़े बजट का सौदा होने के कारण कुछ तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Transfer of Technology) और सोर्स कोड के एक्सेस को लेकर है। इसके अलावा, सरकारी बजट के हिसाब से इतने बड़े फंड को मैनेज करना भी एक बड़ा सवाल है। मार्केट के जानकारों का मानना है कि इस डील के साथ-साथ तेजस (Tejas Mk1-A) और एएमसीए (AMCA) जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर भी नजर रखना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के जरिए भारत का डिफेंस इकोसिस्टम पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा।
