भारत ने अमेरिका से Javelin एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की पुष्टि की है। यह डिफेंस आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसके लिए पहले **$45.7 मिलियन** की मंजूरी मिल चुकी है।
भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस पार्टनरशिप एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत अब अपने जमीनी हमलों को और घातक बनाने के लिए Javelin सिस्टम को अपनी सेना में शामिल करेगा।
कंपनियों पर नजर
Javelin सिस्टम का निर्माण RTX Corporation और Lockheed Martin के जॉइंट वेंचर द्वारा किया जाता है। हालांकि सौदे की कुल कीमत और संख्या अभी फाइनल होनी बाकी है, लेकिन अमेरिकी रक्षा एजेंसी DSCA ने नवंबर 2025 में इसके लिए $45.7 मिलियन के संभावित सेल को मंजूरी दी थी।
'मेक इन इंडिया' का दांव
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात केवल हथियारों की खरीदारी नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर है। भारत सरकार 'मेक इन इंडिया' के तहत विदेशी कंपनियों को स्थानीय पार्टनर्स के साथ मिलकर भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम मजबूत होने की उम्मीद है।
रिस्क और चुनौतियां
डिफेंस सेक्टर में काम करना आसान नहीं है। इतिहास गवाह है कि ऐसे बड़े सौदों में ब्यूरोक्रेटिक अड़चनें, फील्ड ट्रायल्स और टेक्नोलॉजी शेयरिंग को लेकर लंबी बातचीत के चलते देरी होती रही है। अब बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि डील में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को लेकर क्या शर्तें होती हैं और कौन सी भारतीय प्राइवेट कंपनियां इसमें पार्टनर बनती हैं। निवेशकों को इस पूरे प्रोसेस के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
