भारत सरकार रूसी S-400 मिसाइल सिस्टम के पांच नए स्क्वाड्रन खरीदने पर विचार कर रही है। **₹50,000 करोड़** के इस संभावित सौदे में इस बार सिर्फ इंपोर्ट ही नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' पर जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत दो यूनिट्स का निर्माण भारत में होने की उम्मीद है।
भारत का रक्षा मंत्रालय रूसी S-400 ट्राइंफ मिसाइल सिस्टम के पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) ने मार्च 2026 में ही इसे प्रारंभिक मंजूरी दे दी थी। यह कदम उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर भारत की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
कॉम्बैट परफॉर्मेंस से मिली ताकत
मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान S-400 सिस्टम ने अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया था। इस सिस्टम ने लंबी दूरी पर दुश्मन के सर्विलांस विमानों को मार गिराया था। इसी सफल प्रदर्शन ने सरकार को दोबारा इस हथियार प्रणाली में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
'आत्मनिर्भर भारत' की नई दिशा
साल 2018 के पुराने कॉन्ट्रैक्ट से अलग, इस बार का प्रस्ताव 'आत्मनिर्भर भारत' नीति पर आधारित है। योजना के मुताबिक, 3 स्क्वाड्रन इंपोर्ट किए जाएंगे, जबकि 2 यूनिट्स का निर्माण भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए किया जा सकता है। इसके अलावा, देश में ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह कदम घरेलू डिफेंस कंपनियों के लिए भविष्य में रेवेन्यू के नए रास्ते खोलेगा।
रिस्क और चुनौतियां
इतने बड़े सौदे में कुछ भू-राजनीतिक चुनौतियां भी हैं। रूस के साथ इस व्यापार में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भुगतान (Payment) से जुड़ी जटिलताएं आ सकती हैं। इसके अलावा, भारी-भरकम बजट के कारण फिस्कल मैनेजमेंट पर भी दबाव रहेगा। रक्षा विशेषज्ञों की नजर अब टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तों और भारतीय कंपनियों की भागीदारी पर टिकी है, जो इस सौदे की सफलता तय करेगी।
