Ministry of Defence ने 'India AI Mission' के साथ मिलकर सेना के लिए स्वदेशी AI लेयर बनाने का फैसला किया है। इस कदम से सैन्य सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू डिफेंस कंपनियों के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स के द्वार खुल सकते हैं।
स्वदेशी तकनीक की ओर बड़ा कदम
Ministry of Defence ने एक बड़ी रणनीतिक पहल की है, जिसके तहत सेना के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक 'सॉवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) लेयर तैयार की जाएगी। 'India AI Mission' के साथ मिलकर सरकार ऐसे घरेलू कंप्यूटिंग सिस्टम बना रही है, जो टारगेट की पहचान करने से लेकर हथियार प्रणालियों के समन्वय जैसे संवेदनशील कामों को संभालेंगे। इसका मुख्य मकसद विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता को खत्म करना है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि बाहरी सॉफ्टवेयर में 'बैकडोर' या रिमोट शटडाउन जैसे सुरक्षा जोखिम हो सकते हैं।
डिफेंस इंडस्ट्री के लिए नए अवसर
यह बदलाव भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सेना अब अपनी 'सेंसर-टू-शूटर' क्षमता को तेज करने पर ध्यान दे रही है। इस पूरी प्रक्रिया के स्वदेशी AI पर शिफ्ट होने से भारत में बने सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और डेटा इंटीग्रेशन सर्विसेज की भारी मांग बढ़ेगी। यह पूरा प्लान सरकार के 'Make in India' मैंडेट के अनुरूप है, जिसमें कम से कम 50% वैल्यू का निर्माण स्थानीय स्तर पर होना अनिवार्य है।
बाजार पर असर और चुनौतियां
भारत पहले से ही 'ReArm Europe' पहल के तहत 155-mm आर्टिलरी शेल्स, एवियोनिक्स और मिसाइल जैसे एडवांस कंपोनेंट्स का बड़ा एक्सपोर्टर बन चुका है। अब 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स' के आने से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और बढ़ेगी।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मिलिट्री-ग्रेड AI बनाना एक जटिल काम है। इसमें 'एग्जीक्यूशन रिस्क' ज्यादा है, क्योंकि प्राइवेट सेक्टर के लिए इतनी हाई-एंड तकनीक को स्केल करना बड़ी चुनौती होगी। निवेशकों को अब रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी होने वाले टेंडर्स और कंपनीज की डिलीवरी क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
