Ministry of Defence ने फाइनेंशियल ईयर **2026** के लिए डिफेंस डिप्लोमेसी बजट को बढ़ाकर **₹400 करोड़** कर दिया है। नए 'RAKSHA' फ्रेमवर्क का लक्ष्य साल **2030** तक **₹50,000 करोड़** का डिफेंस एक्सपोर्ट हासिल करना है, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
सरकार ने डिफेंस सेक्टर को ग्लोबल हब बनाने के लिए कमर कस ली है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए डिफेंस डिप्लोमेसी का बजट पिछले साल के ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹400 करोड़ कर दिया गया है। इस फंड का इस्तेमाल फ्रेंडली देशों में डिफेंस विंग्स बढ़ाने, इक्विपमेंट गिफ्ट करने और इंफ्रास्ट्रक्चर आउटरीच के लिए किया जाएगा।
'RAKSHA' फ्रेमवर्क और एक्सपोर्ट का लक्ष्य
सरकार का नया 'RAKSHA' फ्रेमवर्क (2026-2036) इस रणनीति का मुख्य आधार है। इसके तहत दुनिया भर में डिफेंस विंग्स की संख्या अभी के 54 से बढ़ाकर 2030 तक 85 से 90 करने की योजना है। इस बदलाव का सीधा मकसद भारतीय डिफेंस कंपनियों को इंटरनेशनल मार्केट में बेहतर एक्सेस दिलाना है ताकि ₹50,000 करोड़ सालाना एक्सपोर्ट का सपना सच हो सके।
निवेशकों के लिए संकेत
यह कदम उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है जो एयरोस्पेस, शिपबिल्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में काम कर रही हैं। सरकार द्वारा कंसेशनल लाइन ऑफ क्रेडिट और नई पार्टनरशिप्स (जैसे वेस्ट अफ्रीका, पैसिफिक और कैरेबियन क्षेत्र) से एक्सपोर्ट की राह आसान होगी। हालांकि, जानकारों का मानना है कि सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कितनी तेजी से प्रोडक्शन स्केल करती हैं और ग्लोबल सप्लायरों के साथ कैसे तालमेल बिठाती हैं। निवेशकों को अब इन कंपनियों के ऑर्डर बुक्स और आने वाली तिमाही के एक्सपोर्ट नंबर्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
