Akash Missile Exports: भारत के डिफेंस सेक्टर में बड़ी हलचल, ताजिकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान को मिलेंगे Akash मिसाइल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Akash Missile Exports: भारत के डिफेंस सेक्टर में बड़ी हलचल, ताजिकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान को मिलेंगे Akash मिसाइल

भारत ने अपने स्वदेशी Akash Air Defence System का निर्यात ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को शुरू कर दिया है। यह Bharat Dynamics Limited (BDL) और Bharat Electronics Limited (BEL) के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं, AMCA फाइटर प्रोग्राम में भी हलचल तेज है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर होनी चाहिए।

डिफेंस एक्सपोर्ट्स में बड़ी छलांग

आर्मेनिया के बाद अब ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को Akash मिसाइल सप्लाई करने का फैसला भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए एक मील का पत्थर है। BDL और BEL की लीडरशिप में बना यह सिस्टम अब दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहा है। Akash मिसाइल किसी भी फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल या UAV को हवा में ढेर करने में सक्षम है, जो इसे भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट का मुख्य हिस्सा बनाता है।

AMCA प्रोजेक्ट की रेस

एयरोस्पेस सेक्टर में अब सबकी नजरें AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट पर हैं। इसके प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए 30 अक्टूबर, 2026 तक बिडिंग की डेडलाइन रखी गई है और साल 2028 के सितंबर तक पहली उड़ान का लक्ष्य है। इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए Tata Advanced Systems, L&T-BEL-Dynamatic ग्रुप और Bharat Forge-BEML-Data Patterns जैसे दिग्गज कंसोर्टियम मैदान में हैं। इस डील का नतीजा संबंधित कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म विजिबिलिटी तय करेगा।

निवेशकों के लिए चेतावनी (Execution Risks)

हालाँकि BDL का ऑर्डर बुक मजबूत है, लेकिन FY26 में कंपनी के परफॉर्मेंस पर तकनीकी दिक्कतों के कारण असर पड़ा था। डिफेंस सेक्टर में तकनीकी खामियां सीधे तौर पर तिमाही नतीजों और डिलीवरी शेड्यूल को प्रभावित करती हैं। साथ ही, मार्केट में करेंसी उतार-चढ़ाव और इंस्टीट्यूशनल आउटफ्लो की वजह से डिफेंस शेयरों पर भी दबाव दिख रहा है।

सरकार का नया कदम

सरकार ने वेंडर ब्लैकलिस्टिंग पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है, जिसमें बैन की अवधि 5 से 7 साल तक सीमित कर दी गई है। इससे पहले 10 साल के लंबे प्रतिबंधों के कारण मेंटेनेंस और सप्लाई चेन में 'स्ट्रैटेजिक पैरालिसिस' का खतरा बना रहता था। अब नई पॉलिसी से सस्टेनेबल सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। निवेशकों को अब इन कंपनियों के एग्जीक्यूशन माइलस्टोंस और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.