भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने डिफेंस एक्सपोर्ट नियमों को सरल बना दिया है। अब Open General Export Licence (OGEL) की वैधता **3 साल** कर दी गई है और इसका दायरा लगभग सभी देशों तक बढ़ा दिया गया है, ताकि कंपनियां ग्लोबल मार्केट में तेजी से डिलीवरी कर सकें।
रक्षा मंत्रालय ने भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट फ्रेमवर्क में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य घरेलू कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच को आसान और तेज बनाना है। 28 अगस्त, 2026 से प्रभावी हुए इन नए नियमों के तहत, OGEL का दायरा उन 41 देशों की सीमित सूची से बाहर निकालकर लगभग पूरी दुनिया तक कर दिया गया है (सिवाय संवेदनशील या प्रतिबंधित क्षेत्रों के)। इस फैसले से उन प्रशासनिक बाधाओं को खत्म करने में मदद मिलेगी जो अक्सर एक्सपोर्ट ऑर्डर में देरी का कारण बनती थीं।
नई गाइडलाइन्स के मुख्य बिंदु
अब OGEL की वैलिडिटी को 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। यह बदलाव मैन्युफैक्चरर्स को अधिक स्थिरता देगा, जिससे वे बिना हर खेप के लिए बार-बार मंजूरी लिए अपनी सप्लाई चेन की बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे। इसके अलावा, नॉन-लेथल इक्विपमेंट और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के लिए भेजे जाने वाले सामानों से अनिवार्य स्टेकहोल्डर परामर्श प्रक्रिया को भी हटा दिया गया है।
डिफेंस सेक्टर की बढ़ती ताकत
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय रक्षा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ के पार पहुंच गया, जिसमें एक्सपोर्ट का आंकड़ा ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक वार्षिक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक ले जाने का है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
निवेशकों के नजरिए से देखें तो, इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा 'ऑपरेशनल फ्रिक्शन' का कम होना है। पहले, एक्सपोर्ट अप्रूवल में लगने वाला समय भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने से रोकता था। अब, ट्रांजैक्शन-बाय-ट्रांजैक्शन ऑथराइजेशन की जरूरत कम होने से कंपनियों की कैश फ्लो साइकिल में सुधार होने की संभावना है। हालांकि, सुरक्षा और अनुपालन (Compliance) के मानक अभी भी सख्त बने हुए हैं, क्योंकि टेक्नोलॉजी डायवर्जन का रिस्क हमेशा रहता है। बाजार की नजर अब इस पर होगी कि भारतीय डिफेंस कंपनियां इस नई छूट का उपयोग करके कितनी तेजी से अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करती हैं और अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाती हैं।
