इस भारी-भरकम आवंटन से डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के लिए रेवेन्यू के बड़े मौके खुलने की उम्मीद है। हाल के वर्षों में, भारतीय डिफेंस एक्सपोर्ट 34 गुना से ज्यादा बढ़ा है, जबकि इंपोर्ट (आयात) 9.3% (2020-2024) तक घटा है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि घरेलू कंपनियों, खासकर प्लेटफार्म, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिपबिल्डिंग सेगमेंट में काम करने वालों के लिए आने वाला समय अच्छा रह सकता है।
वैल्यूएशन का खेल
हालांकि, इस शानदार ग्रोथ के साथ एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है: क्या इन डिफेंस स्टॉक्स के मौजूदा भाव (Valuation) सही हैं?
भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर फिलहाल औसतन 54.82x के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा है। यह आंकड़ा अमेरिकी सेक्टर के 33.1x के मुकाबले काफी ज्यादा है।
- HAL (Hindustan Aeronautics Limited) के शेयर करीब 30-40x के P/E पर हैं, और इसकी मार्केट कैप लगभग ₹2.7 लाख करोड़ है।
- BDL (Bharat Dynamics Limited) का P/E रेशियो 80x से ऊपर चल रहा है, कभी-कभी तो 98x तक पहुंच जाता है। इसकी मार्केट कैप करीब ₹46,000-49,000 करोड़ है।
- Mazagon Dock Shipbuilders और Garden Reach Shipbuilders & Engineers जैसे शेयर 41-42x के P/E पर कारोबार कर रहे हैं।
ये हाई वैल्यूएशन बताते हैं कि निवेशक इन कंपनियों से भविष्य में जबरदस्त कमाई की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन यह कहीं न कहीं सप्लाई चेन की दिक्कतें या एग्जीक्यूशन (क्रियान्वयन) से जुड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज भी कर सकता है।
ग्रोथ के कारण और ग्लोबल रिस्क
इस बढ़ती मांग के पीछे मुख्य कारण चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भू-राजनीतिक तनाव और मध्य पूर्व में चल रही घटनाएं हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च बढ़ाया है। भारत, जो अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक है, उसने पिछले कुछ सालों में अपने इंपोर्ट में 9.3% की कटौती की है।
घरेलू उत्पादन का हिस्सा कुल डिफेंस आउटपुट का करीब 23% हो गया है, लेकिन अभी भी रफाल जेट और पनडुब्बियों जैसे हाई-टेक सिस्टम के लिए विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता बनी हुई है।
कई ब्रोकरेज हाउस, जैसे MOFSL, इन कंपनियों के भविष्य को लेकर पॉजिटिव हैं। उन्होंने HAL के लिए ₹5,500 और BDL के लिए ₹1,800 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मजबूत ऑर्डर बुक और सरकारी समर्थन का संकेत देता है। वहीं, HDFC Securities का मानना है कि BEL (P/E 53-64x) शायद बेहतर वैल्यू ऑफर करता है, जबकि AMS और Data Patterns जैसी कंपनियों का P/E उनके तेज ग्रोथ पोटेंशियल के कारण और भी ज्यादा है।
वैल्यूएशन बबल का डर?
सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और एक्सपोर्ट में मिली सफलता के बावजूद, डिफेंस स्टॉक्स का मौजूदा वैल्यूएशन निवेशकों को सावधान रहने की चेतावनी दे रहा है। पिछले तीन सालों में इन स्टॉक्स की मार्केट कैप में 769% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 54% रही है। यह एक संभावित बबल का संकेत हो सकता है। BDL जैसी कंपनियां, जिनका P/E 98x के करीब है, परफेक्ट भविष्य के लिए कीमत ले रही हैं, जिससे गलतियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं बचती।
डिफेंस सेक्टर सरकारी ऑर्डर्स पर काफी निर्भर है, जो स्थिर तो हैं, पर नीतियों में बदलाव या बजट में कमी से प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, एडवांस प्लेटफॉर्म के लिए इंपोर्ट पर निर्भरता वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं या प्रतिबंधों के कारण प्रोडक्शन में देरी का कारण बन सकती है।