India Defence Exports: 25 गुना से ज्यादा की छलांग! ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य की ओर भारत

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Defence Exports: 25 गुना से ज्यादा की छलांग! ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य की ओर भारत
Overview

भारत के रक्षा निर्यात (Defence Exports) में पिछले कुछ सालों में जबरदस्त उछाल आया है। FY17 में सिर्फ ₹1,535 करोड़ के मुकाबले, FY26 तक यह आंकड़ा ₹38,400 करोड़ तक पहुंच गया है, और FY29 तक **₹50,000 करोड़** का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

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सरकारी नीतियों और प्राइवेट सेक्टर का कमाल

यह तूफानी रफ्तार सिर्फ एक संयोग नहीं है, बल्कि सरकारी नीतियों और प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती सक्रियता का नतीजा है। Rubix Data Sciences की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रक्षा निर्यात FY17 में महज ₹1,535 करोड़ था, जो FY26 तक बढ़कर ₹38,400 करोड़ हो गया है। यह 25 गुना से भी अधिक की वृद्धि है! अब नजरें FY29 पर हैं, जब यह आंकड़ा ₹50,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

'मेक इन इंडिया' का बढ़ता दबदबा

रक्षा बजट में भी बड़ा इजाफा हुआ है, जो FY21 में ₹7.85 लाख करोड़ से बढ़कर FY27 तक ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है। रक्षा मंत्रालय का यह अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। सरकार की नीति घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की है। FY25 में रक्षा मंत्रालय के कुल कांट्रैक्ट्स में से 92% वॉल्यूम के आधार पर और 81% वैल्यू के आधार पर भारतीय कंपनियों को मिले हैं। आज, लगभग 65% रक्षा उपकरण भारत में ही तैयार हो रहे हैं, जबकि एक दशक पहले हम आयात पर बहुत निर्भर थे।

प्राइवेट सेक्टर की जोरदार एंट्री

रक्षा उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी बढ़ी है। FY17 में यह 19% थी, जो FY25 तक बढ़कर 23% हो गई। खास बात यह है कि FY26 में रक्षा निर्यात में प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 45% रही। इस इकोसिस्टम में अब सप्लाई चेन में 16,000 MSMEs और 1,000 से अधिक रक्षा स्टार्टअप्स शामिल हैं, जिन्होंने 2017 से अब तक करीब $2 बिलियन का फंड जुटाया है।

चुनौतियों से पार पाना अभी बाकी

इतनी प्रगति के बावजूद, भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियारों का आयातक (8.2% शेयर, 2021-2025) है। जेट इंजन और एडवांस्ड सेंसर जैसी महत्वपूर्ण हाई-एंड टेक्नोलॉजी के आयात में अभी भी गैप हैं। R&D में कम निवेश और ग्लोबल सप्लाई चेन की अस्थिरता भी बड़ी चुनौतियां हैं।

आगे की राह

इन बाधाओं को दूर करने के लिए, भारत को R&D निवेश में तेजी लानी होगी और इंडस्ट्री व शिक्षा जगत के बीच गहरे सहयोग को बढ़ावा देना होगा। एडवांस टेक्नोलॉजी में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और रक्षा निर्यात में स्थिर वृद्धि बनाए रखने के लिए लगातार पॉलिसी सपोर्ट बहुत ज़रूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.