भारत अब क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए Czech Republic के साथ मिलकर देश में ही **19, 40 और 90 सीटर** विमान बनाने की तैयारी कर रहा है। यह पहल सरकार की 'मॉडिफाइड उड़ान' (Modified UDAN) योजना का हिस्सा है, जिसके लिए **₹28,840 करोड़** का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।
बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और Czech Republic के उप-प्रधानमंत्री कारेल हवलिसेक के बीच हुई हालिया बातचीत ने एविएशन सेक्टर में हलचल मचा दी है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत में ही क्षेत्रीय परिवहन विमानों का निर्माण करना है, ताकि विदेशी विमानों पर निर्भरता को कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि विमानों का स्वदेशी उत्पादन छोटे शहरों और टियर-2, टियर-3 एयरपोर्ट्स के लिए एयरलाइंस की लागत को काफी कम कर देगा।
कारोबार और सहयोग
हालिया द्विपक्षीय बैठकों के दौरान एयरोस्पेस, रेलवे और ऑटोमोटिव सेक्टर में कई एमओयू (MoU) साइन किए गए हैं। दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार लगभग USD 4 बिलियन का है। बता दें कि इससे पहले जनवरी 2026 में 'शक्ति एविएशन एंड डिफेंस सिस्टम्स' ने 'OMNIPOL ग्रुप' के साथ मिलकर Czech-मेड L410 NG विमान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया था, जो इस दिशा में एक बड़ी शुरुआत मानी जा रही है।
निवेश और जोखिम (Risk Factors)
हालांकि, विमान निर्माण का क्षेत्र जितना आकर्षक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। एक कमर्शियल विमान की असेंबली लाइन तैयार करने के लिए DGCA और यूरोपीय रेगुलेटर्स से कठोर सुरक्षा प्रमाणन (Certifications) की आवश्यकता होती है। निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि क्या भारत का एयरोस्पेस इकोसिस्टम, सप्लाई चेन और तकनीकी श्रम शक्ति इस जटिल प्रक्रिया के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय दिग्गज कंपनियों के साथ मुकाबला करने के लिए ऑपरेशनल परफॉरमेंस और लागत दक्षता (Cost-effectiveness) ही सफलता की चाबी होगी।
