CDS जनरल NS Raja Subramani ने बड़ा संकेत दिया है कि पुरानी सीमा-केंद्रित सैन्य रणनीति अब पुरानी हो चुकी है। भारत अब 'मल्टी-डोमेन वॉरफेयर' की ओर बढ़ रहा है, जिससे सरकारी डिफेंस प्रोक्योरमेंट की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल सकती हैं।
आधुनिक खतरों से निपटने की तैयारी
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल NS Raja Subramani ने भारतीय सैन्य सिद्धांत में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अब केवल सीमाओं पर ध्यान केंद्रित करना काफी नहीं है। आज का युद्ध 'मल्टी-डोमेन' है, जहाँ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी ग्रिड और फाइनेंशियल नेटवर्क, मिसाइलों और ड्रोन हमलों के प्रति उतने ही संवेदनशील हैं, जितने कि हमारे सैन्य बेस।
डिफेंस बजट और निवेश की दिशा
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि अब सरकार 'सिस्टम-ऑफ-सिस्टम्स' एप्रोच पर जोर दे रही है। इसका मतलब है कि अब कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) सिर्फ बड़े हार्डवेयर तक सीमित नहीं रहेगा। अब पैसा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, स्पेस-बेस्ड एसेट्स, साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर डायवर्ट होगा।
यह कदम सरकार के 'आत्मनिर्भरता' मिशन के साथ बिल्कुल मेल खाता है। सेना अब ऐसी स्वदेशी तकनीकों को प्राथमिकता दे रही है, जिन्हें युद्ध के दौरान विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर हुए बिना बनाया और रिप्लेस किया जा सके। घरेलू कंपनियों के लिए यह हाई-टेक कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड डिफेंस सिस्टम के क्षेत्र में नए अवसर खोल रहा है।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, यह बदलाव आसान नहीं है। 'थिएटरलाइजेशन' (Theatreisation) की प्रक्रिया—जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना को एक साथ जोड़ना शामिल है—एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव है। निवेशकों को यह ट्रैक करना होगा कि सरकार कितनी तेजी से इन रणनीतिक बदलावों को नए ऑर्डर्स में बदलती है। साथ ही, डिफेंस बजट इन जटिल और महंगे सिस्टम्स की बढ़ती लागत के साथ तालमेल बिठा पाता है या नहीं, यह भी देखना होगा।
आगे चलकर, रक्षा मंत्रालय की तरफ से आने वाली नई प्रोक्योरमेंट पॉलिसी और साइबर-डिफेंस सिस्टम्स के लिए टेंडर अपडेट्स इस सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
