भारत और बांग्लादेश के बीच डिफेंस सहयोग को नई गति मिली है। ढाका में हालिया बातचीत के दौरान दोनों देशों ने जॉइंट ट्रेनिंग और मैरीटाइम सिक्योरिटी जैसे अहम मुद्दों पर फोकस बढ़ाया है, ताकि रीजनल स्टेबिलिटी को बहाल किया जा सके।
डिफेंस संबंधों में नई जान
9 सितंबर, 2026 को ढाका में हुई हाई-लेवल मीटिंग में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के डिफेंस एडवाइजर, ब्रिगेडियर जनरल (रिटायर्ड) डॉ. एकेएम शम्सुल इस्लाम से मुलाकात की। यह बातचीत 2024 के अंत में बांग्लादेश में हुए पॉलिटिकल ट्रांजिशन के बाद दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
क्या है फोकस?
दोनों देशों ने सिंबॉलिक डिप्लोमेसी से आगे बढ़कर सीधे तौर पर डिफेंस आउटकम पर जोर दिया है। इसमें शामिल हैं:
- जॉइंट ट्रेनिंग प्रोग्राम: दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल यानी इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना।
- एक्सपर्टीज एक्सचेंज: प्रोफेशनल जानकारी और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में सहयोग।
- मैरीटाइम सिक्योरिटी: समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करना जो व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी जरूरी है।
निवेशकों और मार्केट के लिए मायने
निवेशकों के लिए यह डेवलपमेंट इसलिए अहम है क्योंकि रीजनल स्टेबिलिटी सीधे तौर पर क्रॉस-बॉर्डर इकोनॉमिक एक्टिविटी और डिफेंस सेक्टर के स्टॉक पर असर डालती है। दोनों सरकारों का इरादा पॉलिटिकल अस्थिरता के बावजूद 'फायरवॉल' बनाकर बॉर्डर सिक्योरिटी और स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन को सुरक्षित रखना है।
हालांकि, चुनौतियां अभी बाकी हैं। चीन और पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश के बढ़ते संबंधों के कारण जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता बरकरार है, जिस पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
